कोरोना संक्रमित रोगियों को ऑक्सीजन का स्तर पता करने के लिए एम्स से ऑक्सीमीटर मिलता है। वहीं संक्रमण से बचाव के लिए एक एन-95 मास्क भी दिया जाता है लेकिन अब एम्स के ऑक्सीमीटर में पल्स ढूंढ़ने से भी नहीं मिली। न ही एन-95 मास्क चेहरे पर पूरी तरह से फिट बैठा। स्थिति यह है कि ऑक्सीमीटर में डबल बैटरी होने के बाद भी वह चालू नहीं हुआ। किसी में ऑन बटन ही काम नहीं कर रहा था।
सोमवार को ‘अमर उजाला’ ने एम्स के दो कर्मचारी और एक संक्रमित रोगी से संपर्क करने के बाद जब इन शिकायतों के बारे में पड़ताल की तो ऑक्सीमीटर और मास्क दोनों के बारे में ही सच्चाई सामने आई है। इसके चलते एम्स की खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि एम्स प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की शिकायत अब तक उन्हें नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर प्रबंधन की ओर से जांच कराई जाएगी।
एम्स के ही एक कर्मचारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर ‘अमर उजाला’ के साथ एक वीडियो भी साझा किया। यह कर्मचारी दो दिन पहले ही कोरोना संक्रमित हुआ है और सांस लेने में तकलीफ भी महसूस कर रहा है। एम्स से कर्मचारी को एक ऑक्सीमीटर दिया गया। जब घर आकर इन्होंने ऑक्सीमीटर को ऑन किया तो वह काफी देर तक ऑफ ही रहा। दो बार बैटरी बदलकर भी इन्होंने देखा लेकिन ऑक्सीमीटर चालू नहीं हुआ।
इसी तरह एम्स के कार्डियो विभाग में कार्यरत एक नर्स ने भी शिकायत की। उनके पास मौजूदा ऑक्सीमीटर चालू हालत में था लेकिन उसमें पल्स ही दिखाई नहीं दे रही थी। कभी उनका एसओ2 (ऑक्सीजन का स्तर) 94 बताता तो अगले ही मिनट वह 89 तक पहुंच जाता। दो मिनट बाद स्क्रीन पर पूरा डिस्पले ही गायब हो जाता है लेकिन उसकी लाइट जलती रहती है। न्यू प्राइवेट वार्ड में भर्ती एक कोरोना मरीज ने भी इसी तरह के ऑक्सीमीटर के बारे में जानकारी दी। मरीज पिछले सप्ताह सात जनवरी को यहां भर्ती हुआ है।
कैसा है एन-95 मास्क, चेहरा भी नहीं होता कवर
एम्स के ही एक नर्सिंग कर्मचारी ने फोटो साझा करते हुए बताया कि उन्हें कोरोना से बचाव के लिए संस्थान की ओर से मास्क दिया गया है। एन-95 मास्क पर बड़े अक्षरों में लिखा है लेकिन जब भी वे इसे पहनते हैं तो चेहरा पूरा कवर ही नहीं होता। पहले उन्हें लगा कि कहीं कोई एक मास्क गलत होगा। उन्होंने अपने दूसरे साथियों से बातचीत भी की तो पता चला कि लगभग सभी के पास ऐसा ही मास्क है और हर कोई यह शिकायत कर रहा है। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन से भी इसकी शिकायत की है। उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब एम्स से नहीं मिला।