आतिशी ने आम आदमी पार्टी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार से सवाल पूछा कि आयोग के न होने से पराली, थर्मल पॉवर प्लांट, ईंट की भट्ठियों और पेट कोक से चल रहे उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर कौन कार्रवाई करेगा। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार की ओर से कदम न उठाए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे दिल्लीवासी जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होंगे।
दिल्ली में प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोत का जिक्र करते हुए आतिशी ने कहा कि टेरी के एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 60 प्रतिशत से अधिक प्रदूषण दिल्ली के बाहर के शहरों से है। खासकर अक्टूबर-नवंबर के दौरान जब पंजाब और हरियाणा में पराली जलाई जाती है, दिल्ली में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंचने से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए आतिशी ने कहा कि दिल्ली में 25 प्रतिशत प्रदूषण कम हुआ है।
दिल्ली सरकार की ओर से 24 घंटे बिजली की सुविधा से जनरेटर से होने वाले के धुएं में कमी आई जबकि औद्योगिक इकाईयों को क्लीन फ्यूल पर शिफ्ट किया गया। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए ईवी पॉलिसी के तहत सब्सिडी सहित दिल्ली के अंदर के सभी थर्मल पावर प्लांट बंद कर दिए गए ताकि प्रदूषण कम किया जा सके। पूसा इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर बायो डी-कंपोजर का प्रयोग भी इस दिशा में सरकार की ओर से बढ़ाया एक कदम है।
आतिशी ने वायु गुणवत्ता आयोग की मियाद खत्म होने दिल्लीवासियों की तरफ से केंद्र सरकार के समक्ष चार सवाल पूछे। इसके तहत पराली जलाने के लिए जिम्मेवार राज्यों पर कैसे होगी कार्रवाई, दिल्ली के 300 किलोमीटर की परिधि में संचालित हो रहे 13 थर्मल पावर प्लांट से होने वाले प्रदूषण पर कौन कसेगा शिकंजा, एनसीआर में संचालित 5000 से अधिक ईंट भट्टियों पर कार्रवाई सहित पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पेट कोक से संचालित औद्योगिक इकाईयों पर कौन कार्रवाई करेगा। इनमें इस्तेमाल होने वाले ईंधन को सर्वाधिक प्रदूषण वाला माना गया है।