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सेहत में सुधार : मंत्रीजी के दौरौं के बाद एम्स और सफदरजंग की तबीयत होने लगी ठीक

Wed, 22 Sep 2021 05:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

एम्स की ओपीडी सेवाओं में हो रहा बदलाव, सफदरजंग भी बदलाव में जुटा। 
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एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में अब तक तीन स्वास्थ्य मंत्री बन चुके हैं लेकिन अस्पतालों का औचक निरीक्षण कोरोना की दूसरी लहर गुजरने के बाद नए स्वास्थ्य मंत्री ने ही शुरू किया है। इसका असर यह हुआ कि दिल्ली के दो सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थानों में अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए मुहिम छिड़ी है। जब से पीएमओ ने नब्ज पकड़ी है तब से एम्स और सफदरजंग अस्पताल दोनों की सेहत में सुधार होने लगा है। स्थिति यह है कि सालों से चिकित्सीय अव्यवस्थाओं पर यहां के प्रबंधन ने कभी बात नहीं की लेकिन अब खुद ही कमेटियां गठित कर खामियां गिना रहे हैं। 

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दरअसल स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया पिछले दो महीने में एम्स और सफदरजंग अस्पताल के ही छह औचक निरीक्षण कर चुके हैं। हर निरीक्षण की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पहुंची है जिसके चलते दोनों ही अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों से अधिक टेंपर न होने की सख्त चेतावनी दी है। एम्स के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि ऐसी शिकायतें पहले भी मरीजों के जरिए आती रही हैं जिसके बारे में लगातार चेतावनी भी दी गई है लेकिन इस बार अंतिम चेतावनी देते हुए मरीज व तिमारदारों के साथ सही तरह से व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं।

पीएमओ की रिपोर्ट को लेकर जब एम्स और सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो फिलहाल इस पर किसी ने भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की लेकिन सफदरजंग अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पिछले कुछ दिन से पीएमओ की रिपोर्ट को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। प्रबंधन से बकायदा अलग अलग टीम बनाते हुए खामियों पर रिपोर्ट मांगी जा रही है और फिर उन्हें दूर करने के लिए समाधान भी मांग रहे हैं। 
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ताकि पीएमओ या फिर स्वास्थ्य मंत्रालय से कोई आदेश आने से पहले ही खामियों को दूर कर लिया जाए। ठीक इसी तरह दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने भी पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री का आदेश मिलने के बाद एक कमेटी बनी थी जिसमें वह भी सदस्य हैं। फिलहाल यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंप दी है जिसमें ओपीडी से लेकर तमाम तरह की दिक्कतों के बारे में जानकारी है। 

स्वास्थ्य मंत्री ने खुद पीएमओ को दी पूरी रिपोर्ट
दिल्ली एम्स के ही अनुसार यहां आने वाले मरीजों में से 35 फीसदी ने मेरा अस्पताल मोबाइल एप के जरिए यह स्वीकार किया है कि एम्स के कर्मचारियों का व्यवहार मरीज एवं तिमारदार के प्रति उचित नहीं रहता है। खासतौर पर यहां जगह जगह तैनात सुरक्षा गार्ड और ओपीडी में कार्यरत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के बोलचाल का तरीका भी गलत होता है। बीते 24 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया भी सुबह तीन बजे जब सफदरजंग अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने स्वयं एक सुरक्षा गार्ड को डंडा लहराते हुए मरीज को हटने के लिए कहते देखा था जिसका जिक्र उन्होंने पीएमओ को भेजी रिपोर्ट में किया है। साथ ही पिछले सप्ताह जब दोबारा से स्वास्थ्य मंत्री सफदरजंग अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने यह पूरी घटना डॉक्टरों से साझा भी की थी।  

अब गिना रहे हैं खामियां
अभी तक देश के बेहतर चिकित्सीय संस्थान होने का दावा करते हुए खामियों पर चुप रहने वाले एम्स और सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन कमियों को खुद ही गिना रहे हैं। एम्स ने 10 डॉक्टरों की एक समिति तक बना दी जिसने ओपीडी से लेकर वार्डों तक में मौजूदा हालातों को लेकर काफी बड़ी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंपी है। इसी समिति के एक सदस्य ने बताया कि एम्स में प्रबंधन की ओर से कभी औचक निरीक्षण नहीं किया जाता है। कहीं भी शिकायतों के समाधान को लेकर विंडो नहीं है। अगर एम्स में किसी को दिक्कत होती है तो उसकी यहां सुनवाई करने वाला कोई नहीं। ऐसे में डॉक्टर को ही दोषी माना जाता है। 

सालों तक नहीं सुनी, अब तुरंत बदला रक्तजांच का समय
एक ओर सफदरजंग अस्पताल ओपीडी व आपातकालीन वार्ड में अव्यवस्थाओं को दूर करने में जुटा है। वहीं दूसरी ओर सालों से मरीजों की अनसुनी कर रहे एम्स प्रबंधन ने स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत मिलते ही तुरंत रक्त जांच का समय बदल दिया। बीते 13 सितंबर को लैब मेडिसिन विभाग से पत्र जारी किया गया जिसके बाद 18 सितंबर को एम्स ने रक्तजांच के समय में तीन घंटे अधिक बढ़ोतरी की। साथ ही सैंपल देने के लिए एक से दूसरे इमारत में परेशान होने की जरूरत भी नहीं होगी। 

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रक्त और रेडियोलॉजी जांच के लिए तीन घंटे का अतिरिक्त समय

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की दखल और स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के बार बार औचक निरीक्षण की बदौलत दिल्ली एम्स में पहली बार मरीजों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। अब एम्स में साढ़े पांच घंटे रक्त और रेडियोलॉजी जांच के लिए तीन घंटे का अतिरिक्त समय बढ़ा दिया है जिसके चलते एम्स में जांच को लेकर मरीजों के लिए काफी सहूलियत आगामी दिनों में देखने को मिल सकती है। 

एम्स प्रबंधन के अनुसार अब नई और पुरानी दोनों ही ओपीडी में सोमवार से शुक्रवार मरीज सुबह आठ से शाम साढ़े तीन बजे तक रक्त जांच के लिए नमूना दे सकते हैं। अभी तक यह सुविधा सुबह आठ से 10.30 बजे तक थी। एम्स के लैब मेडिसिन की तरफ से इस सुविधा की शुरुआत की सूचना 13 सितंबर को ही प्रशासन को दे दी गई थी, जिस पर प्रशासन ने सर्कुलर जारी कर सभी विभागों को सूचित कर दिया है। इस बदलाव की एक वजह एम्स का स्मार्ट लैब है, जिसकी वजह से लैब डिपार्टमेंट की रोजाना जांच करने की क्षमता पहले की तुलना में तीन से चार गुणा बढ़ गई है। 

एम्स की ओपीडी में अक्सर मरीजों को परेशानी होती थी। समय निकलने के बाद मरीजों को अगले दिन दोबारा आकर नमूना देना पड़ता था जिसकी वजह से उन पर आर्थिक बोझ भी पड़ता था। इस बारे में डॉक्टरों से लेकर प्रबंधन तक सभी को जानकारी दी थी लेकिन कभी भी सुधार नहीं किया गया। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री ने जब इस पर जोर दिया तो प्रबंधन के अधिकारी भी बदलाव में जुट गए। 

रक्त जांच के अलावा अब एम्स में रेडियोलॉजी की जांच भी रात आठ बजे तक होगी। अभी तक यह सुविधा सुबह 8 से शाम पांच बजे तक थी लेकिन नए मरीजों को ओपीडी में फाइल बनवाने के लिए ही शाम तक रुकना पड़ता था जिसकी वजह से अल्ट्रासाउंड, एमआरआई जैसी जांच के लिए मरीजों को फिर से आना पड़ता था। 

यहां दे सकेंगे नमूना
अब एम्स में दो जगह रक्त जांच के लिए नमूना दे सकते हैं।  पहला ओल्ड राजकुमारी अमृत कौर ओपीडी और दूसरा न्यू राजकुमारी अमृत कौर ओपीडी बिल्डिंग है। जो जांच सुबह खाने से पहले की जानी चाहिए उसके लिए मरीजों को सुबह 8 से 11.30 बजे तक का समय रखा है। हालांकि शनिवार के लिए जांच का समय सुबह 8 से दोपहर एक बजे तक ही रहेगा। 
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