हादसे से तीन दिन पहले की थी जलभराव की शिकायत, परेशानी को फोटो व वीडियो के साथ उठाया था
शिकायतकर्ता अभ्यर्थी का दावा-गंभीरता से लेते शिकायत तो बच सकती थी छात्रों की जान
आशीष सिंह
नई दिल्ली। राव कोचिंग सेंटर के बाहर जलभराव की समस्या को लेकर हादसे से तीन दिन पहले शिकायत की गई थी। संबंधित विभागों ने ऑनलाइन ही कागजों में इसका समाधान कर दिया। सोमवार को राजेंद्र नगर में अभ्यर्थी कनिष्क तिवारी ने सरकारी सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते हुए पूरी आपबीती सुनाई। कनिष्क के अनुसार, बीते 24 जुलाई को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें जलभराव की परेशानी को फोटो व वीडियो के साथ उठाया।
यह शिकायत संख्या 433682 ऑनलाइन ही 24 घंटे में तीन से चार विभागों तक पहुंची। इसे सभी ने ग्राउंड जीरो पर बेहतर हालात होने का दावा करते हुए शिकायत को ऑनलाइन ही क्लोज कर दिया। कनिष्क का यहां तक कहना है कि अलग-अलग विभागों से उनके पास छह से सात अधिकारियों ने फोन किए और कहा कि आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है, जबकि घटना स्थल के बाहर मामूली बारिश होने पर भी जलभराव देखने को मिल रहा था। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी सिस्टम उनकी शिकायत को गंभीरता से लेता तो आज वह तीन छात्र जीवित होते, जिनकी हादसे में मौत हुई है। उत्तर प्रदेश से दिल्ली में सिविल परीक्षा
की तैयारी करने आईं कनिष्क ने कहा कि हम लोगों में से ही आगे चलकर कुछ लोग अधिकारी बनेंगे, लेकिन हम लोगों की बात नहीं सुनी जाती है। यहां तक कि पूरा प्रशासन ही सवालों के घेरे में है।
हर बार मौत, कब खुलेगी आंख
कनिष्क की तरह सिविल परीक्षा की तैयारी करने वाले अन्य अभ्यर्थियों ने भी सरकारी कामकाज को लेकर नाराजगी जताई है। बिहार के मुंगेर से दिल्ली आए आशुतोष मिश्रा ने कहा कि कुछ दिन पहले पटेल नगर में यूपीएससी के एक छात्र की करंट लगने से मौत हो गई थी। इसके अलावा यहां कई अन्य घटनाएं होती रही हैं, जिन्हें लेकर कभी ठोस समाधान देखने को नहीं मिला है। हर बार सिस्टम की लापरवाही से होने वाली घटना में कोई न कोई मौत हो रही है लेकिन सरकार व उसका सिस्टम नींद से नहीं उठ रहा है।
चिंता में बीती रात, गृह राज्य जाना मजबूरी होगी
मध्य प्रदेश निवासी अंजलि मायूस होकर कहती हैं कि यहां भविष्य के सपने संजोकर आए हैं, लेकिन छात्रों को इसकी कीमत जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ती है। इस घटना के बाद आगे की डगर मुश्किल नजर आ रही है। परिवार वाले भी घबरा गए हैं। घर से बार-बार वापस आने की कॉल आ रही हैं। वह कहती हैं कि दिल्ली का बुनियादी ढांचा ही खराब है। ऐसे में यहां रहकर पढ़ाई करना चुनौतियों से भरा है। कदम दर कदम खतरा है। अगर जल्द सब कुछ ठीक नहीं होता है, तो गृह राज्य जाना उनकी मजबूरी होगी। रविवार की रात अधिकतर छात्रों की चिंता में बीती। आलम यह है कि कई छात्र प्रदर्शन स्थल पर ही देर रात तक डटे रहे। कुछ छात्रों ने तो रात से खाना तक नहीं खाया है।
भविष्य को लेकर चिंता में दिखे
मुखर्जी नगर, नेहरू विहार, करोल बाग, पटेल नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी भविष्य को लेकर चिंता में दिखे। चाय के नुक्कड़, हेयर सैलून, पीजी में हर तरफ सोमवार को इस घटना की चर्चा आम रही। इसका सबसे अधिक खौफ अभ्यर्थियों में नजर आया। ओल्ड राजेंद्र नगर के बड़ा बाजार में अपने दोस्तों के साथ चाय पीने आए रितेश सिंह ने कहा कि लाखों की फीस और उसके बाद रहने का पैसा एडवांस में लिया जाता है। इसके बाद मौत की सजा मिलती है। इतने में ही तेलंगाना के हरीश नायक तपाक से बोले कि वह अब अपने घर वापस चले जाएंगे। टिकट बुक हो गई है। जान से बड़ा कुछ नहीं है। इस पर सहमति जताते हुए महाराष्ट्र के छात्र सात्विक ने कहा कि छात्रों का आत्मविश्वास टूट गया है। घर वालों ने तुरंत वापस आने के लिए कह दिया है। जल्द वापस लौट जाएंगे।
कई लाइब्रेरी चोरी-छिपे अब भी चल रही
घटना के बाद लाइब्रेरी बंद होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कई लाइब्रेरी चोरी-छिपे अब भी चल रही हैं। मुखर्जी नगर स्थित कई लाइब्रेरी से अभ्यर्थी आते-जाते दिखे। छात्र हरिओम कुमार कहते हैं कि फीस दी है। परीक्षा नजदीक है। ऐसे में जान जोखिम में डालकर पढ़ना मजबूरी है। यही नहीं, कई लाइब्रेरी संचालकों ने अपनी लाइब्रेरी को बाहर से ढक दिया है। राजेंद्र नगर में इस तरह की कई लाइब्रेरी नजर आईं। यही नहीं, कई छात्रों ने कोचिंग संस्थानों का विरोध करने की अपील की। इसके लिए छात्रों ने सोशल मीडिया पर कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाया।