नई दिल्ली। शिक्षक राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़े भागीदार होते हैं। वे अपने काम से हजारों जिंदगियों को प्रभावित करते हैं। शिक्षकों व प्रिंसिपलों ने कोरोना महामारी के दौरान कठिनाइयों का सामना करते हुए अविश्वसनीय धैर्य और दृढ़ संकल्प दिखाकर ‘लर्निंग नेवर स्टॉप’ का संदेश दिया। उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने यह बातें राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह में शुक्रवार को कहीं।
दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली सचिवालय में आयोजित समारोह में दिल्ली के सरकारी व निजी स्कूलों के 98 शिक्षकों व प्रिंसिपलों को शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के निदेशक उदित प्रकाश समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रहे इसके लिए शिक्षकों ने स्मार्टफोन का प्रयोग करना सीखा। उन्होंने छात्रों में सही दृष्टिकोण और 360 डिग्री आकलन विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तीन घंटे की परीक्षा द्वारा साल के अंत में रॉट लर्निंग को मूल्यांकन का आधार बनाना हमारे छात्रों और शिक्षकों के प्रति अन्याय है। हमें रट कर सीखने की प्रथाओं को समाप्त करना है।
सिसोदिया ने कहा कि इसके लिए ही दिल्ली शिक्षा बोर्ड की शुरुआत की जा रही है। हमें शिक्षण पद्धति में बदलाव लाना है। हैपीनेस करिकुलम, आंत्रप्रेन्योरशिप करिकुलम और देशभक्ति करिकुलम से इसकी शुरुआत हो चुकी है। डिजिटल लर्निंग के लिए हम दिल्ली में पहले वर्चुअल स्कूल की शुरुआत करने जा रहे हैं।
सरकारी स्कूलों के 69 शिक्षक सम्मानित
समारोह में पुरस्कृत होने वाले शिक्षकों व प्रिंसिपलों में 63 महिलाएं और 35 पुरुष थे। इनमें दिल्ली के सरकारी स्कूलों से 69, प्राइवेट स्कूलों से 18 और दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के 11 शिक्षक शामिल थे। इसके अलावा 11 शिक्षकों और अधिकारियों को सेमी ऑनलाइन शिक्षण गतिविधियों और कोरोना काल में किए गए राहत कार्यों में उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पर्यवेक्षण के आधार पर शिक्षा में अनुकरणीय कार्य करने वाले शिक्षकों को दो विशेष पुरस्कार भी दिए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किए गए शिक्षकों की सूची में आरपीवीवी सिविल लाइंस से पीजीटी (रसायन विज्ञान) अजय चौधरी और एसकेवी पॉकेट-4 ए मयूर विहार से अशोषिका भदौरिया पीजीटी (राजनीति विज्ञान) शामिल रहे।
अशोषिका भदौरिया ने कोरोना महामारी के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई न रुके उसके लिए चिल्ला खादर की झुग्गियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम किया। इसके लिए ही उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार दिया गया।
वहीं कोर अकादमिक इकाई के इंचार्ज परविंदर कुमार ने अपने साथियों के साथ बच्चों के लिए हजारों वर्कशीटों को तैयार किया। छात्रों की पढ़ाई न रुके ये सुनिश्चित करने के लिए लाइव कक्षाएं संचालित कीं ताकि छात्र लगातार सीखते रहें।