नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 10वीं व 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की बोर्ड परीक्षा फीस माफ करने के आग्रह को खारिज दिया। याचिका में फीस का खर्च दिल्ली सरकार को वहन करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि परीक्षा शुल्क को पूर्ण या आंशिक छूट देने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है।
अदालत ने कहा यह सरकार का निर्णय है कि क्या वह हर साल के तथ्यों और परिस्थितियों और प्रशासन की अन्य प्राथमिकताओं के आधार पर विधेयक के जरिये ऐसा निर्णय ले सकती है। ऐसे में वे सरकार को परीक्षा शुल्क को पूरी तरह या आंशिक रूप से माफ करने का निर्देश देने के लिए इच्छुक नहीं है और याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं है।
यह याचिका सार्थक शिक्षा के लिए एक सोसाइटी, पेरेंट्स फोरम द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सीबीएसई ने 2019-20 में परीक्षा शुल्क में मनमाने ढंग से वृद्धि की और 2020-21 में भी उसी को वसूल कर रहा था जबकि हर कोई कोरोना महामारी से आर्थिक रूप से प्रभावित है। वर्ष 2019-20 में दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में बोर्ड परीक्षार्थियों की परीक्षा फीस माफ कर अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि भविष्य के लिए मामला सुलझा लिया जाएगा।
सरकार ने इसी तरह के एक अन्य मामले में अदालत से कहा था कि वह 2020-21 में बिल न लाने का तर्क रखा था क्योंकि उसने पिछले साल ऐसा किया था, यह राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक थी। याची ने कहा कि सीबीएसई प्रति बच्चे से 1500 रुपये फीस वसूल रही है जबकि साइंस के बच्चों से 2400 रुपये लिए जा रहे हैं। गरीब परिवार इस खर्च को वहन करने में असमर्थ है।