नई दिल्ली। लॉकडाउन में नियमों का उल्लंघन कर निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज में आए 45 विदेशी जमातियों ने अपनी गलती नहीं मानी है। इन विदेशियों ने केस लड़ने का फैसला किया है। इनमें कई महिलाएं भी हैं। ये विदेशी जमाती कोर्ट के आदेश के बाद बनाए गए सेंटरों में रह रहे हैं। इन विदेशियों का कहना है कि वह तब्लीगी मरकज में नहीं आए थे। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस एक साथ बड़ी संख्या में विदेशियों को सजा दिलवा कर बड़ी उपलब्ध मान रही है।
तब्लीगी मरकज की जांच पर नजर रखे हुए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि करीब 45 विदेशी नागरिकों ने ट्रायल का सामना करने फैसला किया है। ये नागरिक अमेरिका, फ्रांस, श्रीलंका, ट्यूनिशिय, ब्रिटेन आदि देशों के हैं। अपराध शाखा इन सभी विदेशी नागरिकों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनका कहना है कि वह तब्लीगी मरकज में नहीं आए थे और वह ट्रायल का सामना करेंगे। अपराध शाखा के अधिकारी ने बताया कि तब्लीगी मरकज में आए 907 विदेशियों को सजा हो चुकी है। इन्होंने अदालत में स्वीकार किया था वह टूरिस्ट वीजा पर तब्लीगी मरकज में धर्म का प्रचार करने आए थे। भारत सरकार ने तब्लीगी मरकज में आए करीब 2500 विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
मौलाना साद पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर
तब्लीगी मरकज के मौलाना मोहम्मद साद अभी जामिया नगर में ही रह रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौलाना साद को जामिया नगर में रहने को कहा गया है और सुरक्षा एजेंसियां उन पर नजर रखी हुई हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव से जब मौलाना साद पर कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया तो वह बाद में जवाब देने की बात कहकर टाल गए।