अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विधी गुप्ता आनंद ने मामले को जिला न्यायाधीश के पास भेज दिया ताकि मामला सत्र न्यायाधीश को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री टायटलर पर हत्या का आरोप लगाया गया है और ऐेस में मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में ही हो सकती है।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि मामले में जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया है उनकी प्रतियां पहले ही टायटलर को अविश्वसनीय दस्तावेजों की एक सूची के अलावा प्रदान की जा चुकी हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी आवश्यक समझे जाने वाले किसी भी अन्य दस्तावेज की मांग के लिए सत्र अदालत के समक्ष आवश्यक आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई को पारित एक आदेश द्वारा कथित अपराधों का संज्ञान लिया गया और आरोपी को तलब किया था।
उन्होंने कहा रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि आरोप पत्र अन्य बातों के अलावा आईपीसी की धारा 302 और 436 के तहत दायर किया गया है। एक सत्र अदालत ने पहले टाइटलर को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर अग्रिम जमानत दे दी थी। इसने उन पर कुछ शर्तें भी लगाई थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि वह मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे या बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे। तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के एक दिन बाद 1 नवंबर, 1984 को यहां पुल बंगश इलाके में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी और एक गुरुद्वारे में आग लगा दी गई थी।