कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद दिल्ली एम्स अब धीरे धीरे खाली होने लगा है। यहां चिकित्सा और गैर चिकित्सीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी लगातार संक्रमित हो रहे हैं जिसकी वजह से एम्स में कर्मचारियों की भारी कमी होने लगी है। इसके चलते शुक्रवार को एम्स प्रबंधन ने केवल इमरजेंसी में ही मरीजों को भर्ती करने का फैसला लिया है। गैर आपात स्थिति वाले मरीजों को एम्स में फिलहाल कुछ समय के लिए भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके साथ साथ ओपीडी के लिए भी मरीजों की संख्या को सीमित कर दिया गया है। वहीं ट्रामा सेंटर को मुख्य परिसर में शिफ्ट करने के साथ ही इसे आपातकालीन सेवाओं के साथ जोड़ दिया है।
शुक्रवार को एम्स के निदेशक कार्यालय में भी ज्यादातर कक्ष खाली मिले। यहां मौजूद सुरक्षा गार्डों से जानकारी मिली है कि कार्यालय में आठ से ज्यादा कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए हैं। इसमें निदेशक का पीए ऑफिस भी शामिल है। इसके अलावा प्रोटोकॉल डिवीजन में भी कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आए हैं। वहीं चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में भी तीन कर्मचारी संक्रमित हैं। एम्स प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार बीते एक सप्ताह में यहां 220 कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए हैं जिनमें से 25 कर्मचारियों को न्यू प्राइवेट वार्ड स्थित भू तल पर भर्ती भी करना पड़ा है। एक दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी इन स्वास्थ्य कर्मचारियों से मिलने पहुंचे थे।
अब ट्रामा की ओपीडी लगेगी मुख्य परिसर में
प्रबंधन के अनुसार शनिवार से एम्स के ट्रामा सेंटर की ओपीडी मुख्य परिसर स्थित पुरानी ओपीडी के पांचवें तल पर शुरू होगी। इसी तरह ट्रामा सेंटर का आपातकालीन विभाग एम्स के मुख्य परिसर स्थित पुरानी ओपीडी के भू तल पर संचालित होगा। शुक्रवार दोपहर तक यहां शिफ्टिंग का कार्य जारी था।
एम्स के प्राइवेट वार्ड में भर्ती बंद
एम्स प्रबंधन ने प्राइवेट वार्ड में भी मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। प्रबंधन के इस फैसले को लेकर मरीजों को काफी परेशानी भी हो रही है। मरीजों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य सेवाएं ही बंद हो जाएंगीं तो लोग कहां जाकर अपना इलाज करवा पाएंगें? इसके अलावा एम्स ने यह भी निर्णय लिया है कि एम्स में सभी विशेष क्लीनिक को कुछ समय के लिए बंद करना जरूरी है। केवल फॉलोअप मरीजों के लिए यहां पहले से अपॉइनमेंट लेने के बाद ही स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएंगीं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि राजधानी में कोरोना की संक्रमण दर 17 फीसदी तक पहुंच गई है। लोगों को पहले से अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। हालांकि यह लहर पहले जैसी नहीं हैं। विशेषज्ञों के दावे अलग हो सकते हैं लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि पहले की तुलना में अभी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बहुत कम है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की वजह से दिल्ली में संक्रमण काफी बढ़ रहा है। इसीलिए सरकार ने अन्य राज्यों की तुलना में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। कुछ लोग कह सकते हैं कि इसकी आवश्यकता नहीं, लेकिन बाद में पछताने से बेहतर है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट को हल्का करार नहीं देने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केवल विशेषज्ञ ही बता पाएंगे कि यह हल्का है या नहीं। लेकिन आंकड़ों पर ध्यान दें तो दिल्ली में लगभग 31,498 सक्रिय मामले हैं और केवल 1,091 अस्पतालों में भर्ती हैं। पिछली बार जब इतने ही मामले थे, तब लगभग सात हजार मरीज अस्पतालों में भर्ती था।
मंत्री ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट के कारण संक्रमण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत विभिन्न स्तरों के प्रतिबंध और अलर्ट तैयार किए हैं। पिछली बार जब दिल्ली में 30 हजार सक्रिय मामले थे, तब 24 की तुलना में एक हजार मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इसका मतलब है कि इस बार संक्रमण की गंभीरता कम है।
यह पूछे जाने पर कि जिन रोगियों को ऑक्सीजन सहायता की आवश्यकता नहीं है, वे अस्पतालों में क्यों हैं? स्वास्थ्य मंत्री जैन ने लोक नायक अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां करीब 95 कोविड मरीज हैं। उनमें से केवल 14 को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। अन्य लोग अस्पताल में हैं क्योंकि वे कोविड के अलावा अन्य समस्याओं, जैसे कैंसर या गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित हैं।