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Delhi: 13 महीने बाद बाघिन के शावकों के लिंग की पहचान कर पाए चिड़ियाघर के कर्मचारी, यह लापरवाही आई सामने

Fri, 21 Jun 2024 10:07 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बिग कैट के शावकों के लिंग की पहचान छह से आठ महीने में हो जाती है। इस मामले में लापरवाही सामने आई है। निदेशक के बदल जाने के बाद अब इस वक्त चिड़ियाघर प्रबंधन इस बारे में कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है। मौजूदा निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि दोनों शावक मादा हैं। जबकि पहले 2023 में तत्कालीन निदेशक आकांक्षा महाजन ने इनको नर और मादा बताया था।
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रॉयल बंगाल बाघ के शावक अपनी मां सिद्धि के साथ अठखेलियां करते हुए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कर्मचारी वन्यजीवों के शावकों के लिंग की पहचान नहीं कर पाए। चिड़ियाघर प्रबंधन की लापरवाही के चलते कर्मचारी बीते साल जन्मे रॉयल बंगाल बाघिन के दो शावकों के लिंग पहचान नहीं पाए। इसकी तस्दीक तब हुई,जब जांच ठीक तरह से की गई। 13 महीने बीत जाने के बाद, अब दोनों की पहचान मादा शावकों के तौर पर की गई है।

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शावकों के नामकरण के बाद तक दोनों मादा और नर के रूप में पहचाने गए थे। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी चिड़ियाघर प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इतना समय बीतने के बाद अब पता लगा है। उनका कहना है कि चिड़ियाघर प्रबंधन को इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।  

उधर, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बिग कैट के शावकों के लिंग की पहचान छह से आठ महीने में हो जाती है। इस मामले में लापरवाही सामने आई है। चिड़ियाघर में 18 साल बाद रॉयल बंगाल टाइगर का कुनबा बढ़ा है। यह शावक मादा बाघिन सिद्धि व नर बाघ करण के हैं। इनका जन्म 15 मई, 2023 को हुआ था। दोनों शावक को नामकरण के बाद धात्री और धैर्य को 21 दिसंबर, 2023 को बाड़े में छोड़ा था। 

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निदेशक के बदल जाने के बाद अब इस वक्त चिड़ियाघर प्रबंधन इस बारे में कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है। मौजूदा निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि दोनों शावक मादा हैं। जबकि पहले 2023 में तत्कालीन निदेशक आकांक्षा महाजन ने इनको नर और मादा बताया था। इसके बाद ही इनका नामकरण हुआ था। 

दिल्ली चिड़ियाघर देश के सबसे विशाल प्राणी उद्यानों में से एक है। यह 176 एकड़ में फैला हुआ है। यह लगभग 94 प्रजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 1200 वन्य जानवरों का घर है और देसी और विदेशी पक्षियों की एक विस्तृत विविधता का दावा करता है। 

पांच शावकों को दिया था जन्म
चिड़ियाघर में बीते साल रॉयल बंगाल बाघ सिद्धि ने पांच शावकों को जन्म दिया था। हालांकि, इनमें से तीन की मौत हो चुकी थी, जबकि दो सुरक्षित हैं और अपनी मां के साथ एक ही बाड़े में हैं, दिल्ली जू में यह इतिहास बना है कि वर्ष 2005 के बाद किसी रॉयल बंगाल बाघ ने शावकों को जन्म दिया है। बाघिन सिद्धि और अदिति को नागपुर से लाया गया था। नन्हें मेहमानों के आने से चिड़ियाघर प्रबंधन के साथ यहां घूमने आने वाले दर्शक भी उत्साहित हैं। चिड़ियाघर प्रबंधन द्वारा लंबे समय से बाघों के संरक्षण व प्रजनन की प्रक्रिया की पहल की जा रही है। इधर बढ़ती गर्मी को देखते हुए चिड़ियाघर प्रबंधन शावकों की विशेष देख रेख में जुटा है। 
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एक साल के अंदर होती है पहचान
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देश के अनुसार जब तक शावक एक साल के नहीं हो जाते, तब तक उनके लिंग के बारे में बताया नहीं जाता है। वह कहते हैं कि जब पहचान से पहले ही उनके नाम की घोषणा कर दी जाती है, तो तब ऐसी चूक हो सकती है। उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर में वन्यजीवों के शावकों के लिंग की पहचान पशु चिकित्सक और बायोलॉजिस्ट करते हैं। जब तक इन्हें इलाज की जरूरत नहीं होती है, तब तक शावकों के पास कोई नहीं जाता है। केवल जू कीपर ही उन्हें खाना देते हैं।

12 बाघ चिड़ियाघर की बढ़ा रहे शान
मौजूदा समय में चिड़ियाघर में 7 बंगाल बाघ हैं। इसमें दो शावक समेत तीन मादा बाघिन अदिति, बरखा, सिद्धि व एक नर बाघ करण के साथ मुकुंदपुर से आया बाघ शामिल हैं। करण इकलौता नर बाघ है और इसकी भी उम्र भी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा, यहां सफेद बाघिन सीता, अवनी व नर बाघ टिपू, विजय, वियोम शामिल हैं। चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से बाघों के संरक्षण व प्रजनन की प्रक्रिया की पहल की जा रही है। यहां नर बंगाल बाघ की लंबे समय से कमी खल रही है।
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