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प्यार करते थे और प्यार में बने थे शारीरिक संबंध

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जज साहब अदालत में उपस्थित आरोपी ने रेप नहीं किया, बल्कि दोनों की आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए गए थे। आरोपी ने कुछ कारणों से बात बंद कर दी और मैंने व्यथित होकर रेप की शिकायत की थी।
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अब हमने विवाह कर लिया है और सुखी हैं। अदालत ने कथित रेप पीड़िता के उक्त बयान के आधार पर इलाहाबाद निवासी पवन गिरी को बरी कर दिया।

द्वारका स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेन्द्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता युवती ही मुख्य गवाह है और अब वह अपने बयानों से मुकर गई।

दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे

युवती ने बयानों में स्पष्ट कहा कि दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे और प्यार में ही युवती की रजामंदी से संबंध बने। युवती ने कहा है कि आरोपी ने उससे बात बंद कर दी थी और उसने सोचा कि वह उसके प्रति उदासीन हो गया है।

अदालत ने कहा कि युवती के बयानों से स्पष्ट है कि आरोपी ने कभी भी उससे विवाह से इनकार नहीं किया था लेकिन उसने गलतफहमी के चलते रेप का मामला दर्ज करवा दिया।

युवती ने 18 सितंबर 2014 को शिकायत दर्ज करवाई थी जबकि दोनों का 15 अक्तूबर 2014 को विवाह हो गया। ऐसे में आरोपी के खिलाफ रेप का मामला नहीं बनता है, अत: वे उसे बरी कर रहे हैं।
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मैंने शर्म के कारण किसी को नहीं बताया

पेश मामले के अनुसार गुड़गांव में एक कंपनी में काम करने वाली युवती ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसके विवाह की बात आरोपी से चल रही थी। इसी कारण उनके बीच फोन पर बात होती थी।

आरोपी इलाहाबाद से किसी काम से दिल्ली आया व उसे महिपालपुर बुलाया व दोनों चार दिन एक साथ रहे और उसने बिना उसकी इच्छा के शारीरिक संबंध बनाए।

इसके बाद आरोपी ने कहा कि वह दो वर्ष तक विवाह नहीं कर सकता। युवती ने कहा कि मैंने शर्म के कारण किसी को नहीं बताया कि उसके साथ रेप हुआ है। इसी बीच आरोपी की मां का फोन आया व उसने कहा कि वे विवाह के लिए तैयार है और इसके बाद आरोपी के पिता व बहनों ने भी मिलकर विवाह की रजामंदी दी लेकिन आरोपी ने 23 अगस्त को विवाह से मना कर दिया, अत: उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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