करहेड़ा तिराहे के पास शुक्रवार दोपहर चलती कार में आग लगने से हड़कंप मच गया। कार में फंसे हर्षित और उसके दोस्त को अर्थला के कार मैकेनिक यूसुफ समेत कई युवकों ने जान पर खेलकर बचाया।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक असहिष्णुता जैसे मामले सिर्फ राजनेताओं के रचे हुए हैं। आम पब्लिक आज भी भाईचारे को ही तवज्जो देती है।
मेरठ निवासी हर्षित गर्ग दोस्त के साथ अपनी कार से साहिबाबाद आए थे। लौटते समय उन्होंने आईटीएस कॉलेज के पास पंप से पेट्रोल भरवाया।
यहां से चले ही थे तभी जीटी रोड पर अचानक कार से धुआं उठने लगा और कार सड़क के बीचोंबीच रुक गई। दरवाजे लॉक हो गए। दोनों युवक गेट खोलने की कोशिश कर ही रहे थे तभी बोनट से आग की लपटें उठने लगीं।
हर्षित ने तुरंत हाथ उठाकर लोगों को सूचित किया। इस जगह ज्यादातर मुसलमानों की ही दुकानें हैं। उन्होंने तत्काल पत्थर से कार का शीशा तोड़ दिया आैर हर्षित और उसके दोस्त टूटी खिड़की से निकाला।
इसी दौरान लोगों की सूचना पर पंद्रह मिनट बाद फायर ब्रिगेड पहुंची। फायरकर्मियों ने जब तक आग पर काबू पाया लेकिन तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी।
एफएसओ अजय शर्मा ने बताया कि कार में सीएनजी किट थी। मामला शॉर्ट सर्किट से आग का लग रहा है।
चंद सेकेंड की देरी ले सकती थी जानः हर्षित ने बताया कि उनके बाहर कूदते ही पूरी कार ने आग पकड़ ली। अगर 4-5 सेकेंड की भी देरी होती तो जान चली जाती।
आधे घंटे थमा रहा जीटी रोडःइस दौरान जीटी रोड पर ट्रैफिक रोक दिया गया। दमकल की गाड़ी भी मोहन नगर से करहेड़ा रोड होते हुए घटनास्थल पर पहुंची।