पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी ने फ्लड कंट्रोल विभाग को सतर्क रहने के लिए कहा है। यमुना के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित दूसरे स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। दिल्ली सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि बाढ़ के बचाव के लिए जितने भी उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं उनका भी निरीक्षण किया जा चुका है। दिल्ली के अंदर 16 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे की मदद से निगरानी की जा रही है। दिल्ली सरकार नदी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के रहने व खाने का इंतजाम कर रही है।
205.33 मीटर है खतरे का निशान
रविवार को शाम पांच बजे तक पुराने लोहा पुल के पास यमुना का जलस्तर करीब 203.57 मीटर तक मापा गया। यहां चेतावनी का स्तर 204.5 मीटर है और 205.33 मीटर खतरे का निशान अंकित किया गया है। दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में जिस तरह से तेज बारिश हो रही है, यदि हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज में जलस्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ेगा तो अचानक भारी मात्रा में वहां से पानी एक साथ छोड़ा जा सकता है।
1978 में आई थी भयंकर बाढ़
दिल्ली में 1978 में भयंकर बाढ़ आई थी, उस साल हथिनी कुंड बैराज से एक साथ 224390 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिसके कारण लोहा पुल पर यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद 2010 और 2013 में भी दिल्ली में बाढ़ आई थी, दोनों बार लोहा पुल पर यमुना का जलस्तर 207 मीटर के पार चला गया था।