अब यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल शुल्क से मिलने वाली रकम का 25 फीसदी हिस्सा एस्क्रो खाते में जमा होगा। यह रकम यमुना एक्सप्रेसवे के रखरखाव पर खर्च होगी। यमुना प्राधिकरण बोर्ड ने इस पर मुहर लगा दी है। वहीं, बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे का टोल नहीं बढ़ाया गया है।
बोर्ड बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे के हादसों को रोकने के लिए आईआईटी दिल्ली से सेफ्टी ऑडिट कराया गया था। उसकी रिपोर्ट के आधार पर जेपी कंपनी को कोई कार्य कराने थे। मुख्यमंत्री ने भी यमुना एक्सप्रेसवे पर लाइटें लगाने के लिए कहा था, लेकिन कंपनी अब बहुत ही कम कार्यों को करा सकी है। इन कार्यों पर 138 करोड़ रुपये खर्च करने थे, जिसमें से कंपनी ने सिर्फ नौ करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
इसे देखते हुए प्राधिकरण बोर्ड ने निर्णय लिया है कि यमुना एक्सप्रेसवे से मिलने वाले कुल टोल शुल्क का 25 फीसदी रकम एस्क्रो खाते में जमा होगा। इस रकम को रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। हर माह करीब 28 से 30 करोड़ रुपये टोल शुल्क मिलता है। अभी तक ये पूरा पैसा जेपी कंपनी के पास जाता है। बता दें, कि यमुना एक्सप्रेसवे से हर माह करीब 29 हजार वाहन सफर करते हैं।