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ये है यादव सिंह के वफादारों का हाल

Wed, 05 Aug 2015 10:55 PM IST
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
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काले धन के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करते ही यादव सिंह के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी।
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सीबीआई यादव सिंह और परिवार वालों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने आई थी, लेकिन नोएडा में छापेमारी कर रही सीबीआई की आधा दर्जन टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

यादव सिंह, पत्नी कुसुम, बेटा सनी यादव और बेटी गरिमा भूषण सीबीआई के रडार पर हैं। सुबह से शाम हो गई, लेकिन यादव सिंह और उनके परिजनों का कुछ भी पता नहीं चला।

ए-38, सेक्टर-27 स्थित ‘गंगा सदन’ यादव सिंह के बंगले में किरायेदार के अलावा कोई नहीं मिला। फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरा है जहां यादव सिंह के कुछ दस्तावेज व सामान रखा था। यहां सनी आता रहता है।
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जब मर्सडीज देख चौंक गए अधिकारी

सीबीआई की इकोनॉमिक ऑफेंसेंस डिवीजन छापेमारी के लिए जब यादव सिंह के ठिकानों पर पहुंची तो उनके अधिकारियों को भरोसा था कि कुसुम व सनी तो जरूर मिल जाएंगे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

ए-38 स्थित बंगले में सनी यादव का ज्यादातर आना जाना रहता है। मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक सफेद मर्सडीज कार रुकी, अधिकारियों की नजर उस पर गई।

सीबीआई अधिकारियों को लगा कि शायद इसमें सनी यादव है, लेकिन कार के विंड शील्ड से एक शख्स बाहर झांका और कार लेकर चला गया।

सीबीआई टीम को बंधक बनाने की अफवाह

सेक्टर-27 स्थित ए-38 में सुबह करीब नौ बजे जैसे ही सीबीआई की टीम छापेमारी के लिए पहुंची तो वहां पर तैनात गार्ड ने उनका परिचय पूछा और मेन दरवाजा खोल दिया।

घर के भीतर सीबीआई की टीम पहुंची और उन्होंने जैसे ही अपना परिचय यादव सिंह के किरायेदार को दिया, उन्होंने फौरन कमरे का दरवाजा बंद कर दिया।

सीबीआई टीम ने दरवाजा तोड़ना मुनासिब नहीं समझा और उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को घटना की सूचना दी। कंट्रोल रूम को सूचना मिली, लेकिन अफवाह यह फैल गई कि सीबीआई टीम को बंधक बना लिया गया है।

मौके पर लोकल पुलिस पहुंची और उसके बाद दरवाजा खुलवाया और सीबीआई के अधिकारियों ने किरायेदार से सहयोग करने को बोला। उसके बाद अधिकारियों ने जांच पड़ताल की।

बेचारे बने रहे जर्मन शेफर्ड और पग

कभी निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह के घर की शान रहे एक जर्मन शेफर्ड और पग मंगलवार को सेक्टर-51 के बंगले के सामने बेचारे बने बैठे रहे।

सिक्योरिटी गार्ड के वहां से फरार होने की वजह से उन्हें कोई खाना देने वाला भी नहीं था। ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें हमेशा के लिए ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया हो।

पग को बांधकर रखा गया था, जबकि जर्मन शेफर्ड खुला हुआ था, लेकिन सीबीआई की छापेमारी के दौरान दोनों शांति से एक जगह बैठे रहे।
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घर के बाहर दिखी थीं गाड़ियां

सेक्टर-51 स्थित यादव सिंह के घर के बाहर सोमवार शाम को कई गाड़ियां खड़ी दिखीं थी। ऐसा उनके पड़ोसियों का कहना है।

उनकी मानें तो यादव सिंह के बॉडीगार्ड और घर के कुछ सदस्य सोमवार शाम तक घर में दिखे थे। लेकिन संभावना है कि मंगलवार सुबह चार बजे तक सभी वहां से फरार हो गए।

सीबीआई की टीम सुबह करीब 06.30 बजे बंगले पर पहुंची थी और वहां किसी को नहीं पाया। घर के बाहर ताला लगा हुआ था।
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