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आयुष डॉक्टरों की मांग, जंक फूड पर सख्त कानून बनाए सरकार

Fri, 15 Nov 2019 09:27 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जंक फूड - फोटो : अमर उजाला
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विश्व मधुमेह दिवस पर बृहस्पतिवार को राजधानी के आयुष डॉक्टरों ने सरकार से जंक फूड पर सख्त कानून बनाने और उसे लागू करने की मांग की है। इनकी मांग है कि सभी स्कूलों में हर दिन 1 घंटे का समय शारीरिक स्वास्थ्य के लिए तय होना चाहिए, ताकि बच्चों को स्कूल से ही शारीरिक व्यायाम और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताया जा सके।
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डीएवी रिसर्च सोसायटी फॉर हेल्थ द्वारा मधुमेह जागरूकता अभियान भी चलाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, जंक फूड व प्रोसेस्ड फूड में तेल, घी और मक्खन की गुणवत्ता और मात्रा की जांच के लिए सख्त कानून बनना चाहिए। 

स्कूल कैंटीन में जंक फूड और फास्ट फूड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही सभी स्कूलों में शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन 1 घंटे का समय निश्चित किया जाए, जिसमें व्यायाम, योग और तनाव मुक्ति थेरेपी की प्रैक्टिस कराई जाए।
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संस्था के संरक्षक डॉ. आरपी पाराशर ने बताया कि डायबिटीज के बारे में लोगों को शिक्षित करने और बीमारी को रोकने के लिए संस्था की ओर से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्कूलों के माध्यम से यह अभियान पूरी दिल्ली में चलाया जाएगा। 
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इस समय विश्व भर में मधुमेह के 42 करोड़ से अधिक रोगी हैं जिनमें से 7 करोड़ से अधिक भारत में ही हैं। स्कूल कैंटीन में जंक फूड खाने के अलावा बच्चे दिन भर में टॉफी, चॉकलेट, बिस्कुट और चिप्स का सेवन भी करते हैं जिससे शरीर में फैट, ग्लूकोस और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है 

जो मधुमेह की उत्पत्ति के प्रमुख कारण हैं। बच्चों के साथ साथ माता-पिता को भी स्वस्थ और पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में बताया जाएगा। मधुमेह से बचाव और इलाज के लिए गेहूं के साथ चने, ज्वार और दालों से बने आटे का प्रयोग करें, सब्जियों में घिया, तोरी, टिंडा, पालक, परवल, खीरा, ककड़ी और करेले का प्रयोग नियमित रूप से करें।
 
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