ग्रेटर नोएडा में महिला शक्ति सामाजिक संगठन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक ज्ञापन भेजा। डीएम को सौंपे ज्ञापन में महिलाओं ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री जी रोने-धोने का काम आपका नहीं है, बल्कि कोई कड़ा फैसला लीजिए, जिससे संसद की गरिमा बची रहे।’
महिला संगठन की अध्यक्ष रूपा गुप्ता ने जिक्र किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में सांसदों के अभद्र और असंसदीय व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं को देखकर उनका रोने का मन करता है।
संगठन की नेता आरती शर्मा ने कहा कि रोने-धोने का काम प्रधानमंत्री का नहीं है। जनता ने ठोस काम करने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है, न कि लाचारी दिखाने के लिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कठोर कानून बनना चाहिए, जिससे ऐसे सांसदों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
इस मौके पर बीना शुक्ला, शांति देवी, सरला विधूड़ी, सत्या धवन, रमा भदौदिया, सुरेंद्र कौर, मीना बंसल, पिंकी वर्मा, ऊषा और अनीता चौहान आदि मौजूद रहीं।
सदन की घटना की निंदा
आर्य प्रतिनिधि सभा ने बृहस्पतिवार को सदन की घटना को संसदीय इतिहास का काला दिन करार देते हुए एक गोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने सांसदों के इस कृत्य की घोर निंदा की। सभा के जिला उपाध्यक्ष डा. आनंद आर्य ने कहा कि सांसदों के इस कृत्य से भारतीय संसद पूरे विश्व में शर्मसार हुई है। ऐसे सांसदों को केवल निलंबन करके ही न छोड़ा जाए। बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की जाए। इस मौके पर सुधीर रावल, प्रेमपाल शास्त्री, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विश्वनाथ गर्ग, प्रेमपाल राणा, वेगराज आर्य ने भी अपने विचार रखे।