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20 विधायकों की सदस्यता जाने के बावजूद कांग्रेस और भाजपा की मुराद नहीं होगी पूरी

Sat, 20 Jan 2018 09:57 AM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अयोग्य करार देने के बावजूद निकट भविष्य में चुनाव संभव नहीं
- आप विधायकों के पास है राहत का रास्ता
- हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का खटखटा सकते हैं दरवाजा
- संभवत: जब तक फैसला आए तब तक विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की संभावना
 
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों के लाभ के पद के मुद्दे को लेकर सदस्यता जाना तय है, बावजूद इसके निकट भविष्य में दिल्ली में इन सीटों पर उपचुनाव की संभावना बहुत कम दिख रही है।

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हालांकि भाजपा व कांग्रेस के नेता इस फैसले से काफी खुश हैं और वे चुनाव की आहट महसूस कर दिल्ली विधानसभा में अपनी संख्या बल बढ़ना देख रहे हैं। दोनों ही पार्टियों के मंसूबों पर कानून का रास्ता अड़चन बन सकता है।

दरअसल सभी 20 विधायकों के पास हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है और कानून के जानकारों के अनुसार इन अदालतों में जल्द फैसला आने की भी संभावना नहीं है यानि जब तक फैसला आएगा दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की अवधि भी नजदीक आ जाए।

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क्यों मायूस हैं आम आदमी पार्टी के नेता

- फोटो : अमर उजाला
इसमें कोई संदेह नहीं है कि निर्वाचन आयोग के फैसले से सभी विधायक ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के नेता भी मायूस हैं, भले ही वे यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि यह निर्णय एक षड्यंत्र के तहत करवाया गया है।

इस मामले में दिलचस्प बात यह है कि जब वर्ष 2015 में विधायकों की सदस्यता को चुनौती दी गई थी उस समय भी कांग्रेस व भाजपा के नेताओं ने उपचुनाव की तैयारी कर ली थी लेकिन इन बातों को भी ढाई वर्ष बीत गए है, लेकिन अभी तक उपचुनाव नहीं हुए।

कानून के जानकार आर के सैनी के अनुसार यह कहना गलत है कि जिन विधायकों को अयोग्य ठहराया जाएगा उन्हें चुनौती का अधिकार नहीं। संविधान के अनुच्छेद 226 व 32 के तहत वे रिट याचिका के जरिए चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
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कोर्ट में लंबा लटक सकता है मामला

यह अदालत के विवेक पर है कि वह फैसले पर रोक लगा कर याचिका पर सुनवाई करें या फिर बिना रोक लगाए। इतना तय है कि अदालत में एक बार याचिका दायर होने के बाद जल्द निर्णय की संभावना न के बराबर है।

यानि लंबी कानूनी लड़ाई के चलते मामला ठंडे बस्ते में जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता के अनुसार याचिका के जरिए राष्ट्रपति व चुनाव आयोग के निर्णय को भी चुनौती दी जा सकती है।

हर नियुक्ति राष्ट्रपति के जरिये ही होती है उसे जब चुनौती दी जा सकती है तो इस निर्णय को क्यों नहीं। कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी माना कि विधायकों के पास हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है।

उनका मानना है कि एक बार अदालत में मामला चले जाने पर जल्द फैसले की संभावना कम ही है। अदालत सभी पक्षों का तर्क सुनेगी और ऐसे में तय है कि अदालत का फैसला आने में समय लगेगा, इसके अलावा विधायक भी नहीं चाहेंगे कि जल्द फैसला आए और वे हर संभव प्रयास भी करेंगे कि सुनवाई लटकी रहे।
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