आम आदमी पार्टी में आतिशी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई है। आम आदमी पार्टी अपने आठ साल के कार्यकाल में जिन उपलब्धियों को सबसे ज्यादा बार गिनाती रही है उनमें शिक्षा का क्षेत्र सबसे ऊपर है और इसका बहुत बड़ा श्रेय आतिशी को जाता है। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी का मेनिफेस्टो तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रवक्ता बनाया गया था। 2019 में उन्होंने पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। 2020 में उन्होंने कालकाजी विधानसभा से चुनाव जीता। आतिशी शुरू से ही दिल्ली की शिक्षा क्रांति का महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं। यह सभी जानते हैें कि शिक्षा मंत्री के तौर पर मनीष सिसोदिया ने जो काम किए उसमें आतिशी ने उन्हें काफी सहयोग किया। आतिशी ही मनीष सिसोदिया की सलाहकार रही हैं और हर रणनीति उन्होंने ही बनाई है। जानिए उनसे जुड़ी खास बातें-
- आम आदमी पार्टी में की महिला नेता आतिशी मार्लेना एक होनहार स्टूडेंट, बेहतरीन टीचर होने के साथ ही शैक्षणिक योग्यता में भी अव्वल हैं। वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। वह शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए जानी जाती हैं।
- दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार का सबसे बड़ा श्रेय आतिशी को दिया जाता है। वह आप की राजनीति मामलों की समिति की सदस्य भी हैं।
- आतिशी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रह चुकी हैं लेकिन अप्रैल 2018 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।
- दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आए क्रांतिकारी बदलाव के पीछे आतिशी को जिम्मेदार माना जाता है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के साथ उन्होंने स्कूलों की कायापलट में जबरदस्त मेहनत की है।
- आतिशी ने ही सरकारी स्कूलों में हैप्पीनेस करिकुलम की शुरुआत की।
- आतिशी की मां तृप्ता वाही और पिता विजय कुमार सिंह डीयू में प्रोफेसर थे। आतिशी ने स्कूल के समय में मार्क्स और लेनिन से बनने वाले शब्द 'मार्लेना' को अपने नाम के साथ जोड़ दिया था।
- एक दौर में बहुत से लोगों ने 'मार्लेना' अपने नाम के साथ इसी तरह जोड़ा था। लेकिन कुछ विवादों के चलते उन्होंने अपने नाम से 'मार्लेना' हटा दिया, अब वह सिर्फ आतिशी ही लिखती हैं।
सौरभ भारद्वाज दिल्ली की ग्रेटर कैलाश विधानसभा से तीन बार लगातार विधायक हैं। वह आम आदमी पार्टी की पहली बार 2013 में बनी सरकार में चार बड़े विभागों के मंत्री रहे थे। आप की यह सरकार मात्र 49 दिन चली थी। भारद्वाज के पास परिवहन, खाद्य और आपूर्ति, पर्यावरण और जीएडी विभाग थे। इसके बाद वे फिर से 2015 में भी विधायक चुने गए, हालांकि इस बार उन्हें कोई मंत्रालय नहीं दिया गया। इसके बाद सौरभ 2020 में तीसरी बार विधायक चुने गए और साल 2022 में दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष चुने गए। उन्होंने राघव चड्ढा के इस्तीफे के बाद ये जिम्मेदारी संभाली थी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी उनका काम अच्छा माना जाता रहा है। उन्हें सरकार और संगठन दोनों का अच्छा अनुभव है साथ ही वह बीटेक के विद्यार्थी होने के चलते तकनीक के अच्छे जानकार हैं। पार्टी को उनके अनुभव का काफी लाभ मिलेगा।