दिल्ली के चिड़ियाघर में सफेद बाघिन 'कल्पना' का छठवें बच्चे पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। डॉक्टरों का मामना है कि कल्पना के एकमात्र जीवित शावक को अगर डॉगी का दूध मिल जाता है तो वह बच सकता है।
फिलहाल कल्पना के एकमात्र जीवित शावक को चिड़ियाघर के अस्पताल में रखा गया है। उसे जिंदा रखने के लिए जू के डॉक्टरों की निगरानी में बकरी का दूध दिया जा रहा है।
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दरअसल कुछ ही दिनों पहले दिल्ली के चिड़ियाघर में एक सफेद बाघिन ने छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन उसके पांच शावकों की मौत हो गई।
इसे पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। एक क्यूरेटर का कहना है कि बाघिन अपने बच्चों को ध्यान नहीं रख रही है। इसलिए उनकी मौत हो गई।
साथ ही अनुवांशिक तौर पर कमजोर होने की बात भी की जा रही है। वन्य जीव विशेषज्ञ का फयाज कुदसर का कहना है कि सफेद बाघ की प्रजाति अनुवांशिक रूप से कमजोर होती है।
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ऐसे में आसानी से वह विभिन्न रोगों से ग्रस्त हो जाता है। देखभाल में थोड़ी सी कमी शावकों के लिए जानलेवा साबित होती है। इसमें रोग निरोधी क्षमताएं भी अधिक नहीं होती, यही उसकी मौत की वजह बनती है।
फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन शावक के लिए डॉगी के दूध की व्यवस्था करने में जुटा है, लेकिन अभी तक तक इसकी व्यवस्था नहीं हो सकी है।