साइबर सिटी का महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल हब उद्योग विहार इन दिनों भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। यहां तीन हजार से अधिक औद्योगिक यूनिटें और आईटी-बीपीओ कंपनियां हैं। इन सभी को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। यहां तीन लाख से अधिक लोग काम करते हैं, इन सभी की प्यास वाटर टैंकर की मदद से बुझाई जाती है।
इसके लिए उद्योगों को हर माह लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि एचएसआईआईडीसी को वह हर माह वाटर टैक्स देते हैं फिर भी पानी खरीदना पड़ा रहा है। आखिर ऐसे माहौल में यहां हैपनिंग हरियाणा का सपना कैसे साकार हो सकता है।
हरियाणा सरकार ने गुड़गांव में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन कर देश-विदेश के निवेशकों को यहां इन्वेस्ट करने का न्योता दिया। निवेशकों ने सरकार के आश्वासन पर करीब छह लाख करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया। उद्यमियों की शिकायत है कि सरकार अपने वायदे पर खरी नहीं उतर रही है। उद्योग विहार के खस्ताहाल बुनियादी ढांचे को सुधारने की कोई पहल अभी तक नहीं हुई है।
गर्मी आने से पानी की उपलब्धता काफी कम हो गई है। उद्योग जगत का कहना है कि हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) वाटर टैक्स लेने के बाद भी जलापूर्ति नहीं कर पा रहा है। उद्योग विहार फेज-1 प्लाट नंबर 180-181 के ऑनर गौतम कपूर का कहना है कि रोजाना टैकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। एचएसआईआईडीसी द्वारा जिस वाटर लाइन से उद्योगों को जलापूर्ति की जाती है, उसी लाइन से माजा की यूनिट और फायर स्टेशन भी जुड़ा हुआ है।
सारा पानी इन दोनों के द्वारा खींच लिया जाता है। उद्योग विहार के फेज-1, 2 व 3 को मात्र 10 मिनट के लिए पानी मिलता है। ऊपर यह भी है कि पानी कब आएगा इसका भी कोई समय निर्धारित नहीं है। नल से पानी के स्थान पर हवा ज्यादा निकलती है। कपूर कहते हैं कि उद्योग विहार के एक से लेकर पांच फेज तक पानी का संकट है। यहां वाटर लेवल 400 फुट नीचे चला गया है।
8000 रुपये प्रति टैंकर खरीदना पड़ रहा है पानी
उद्योग विहार में औद्योगिक यूनिटों में काम करने वालों की प्यास बुझाने के लिए प्रति टैंकर 8000 रुपये में पानी खरीदना पड़ रहा है। बड़े औद्योगिक यूनिटों में तो रोजाना कई टैंकर पानी की खपत होती है। उद्योगों को पानी के लिए अतिरिक्त लाखों रुपये हर माह खर्च करना पड़ रहा है।