अनुबंध व अस्थायी कर्मियों के नियमन में रोड़ा अटकाने के लिए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल नजीब जंग को कठघरे में खड़ा किया है। संवाददाता सम्मेलन करके सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा विभाग ने उमा देवी केस को आधार बनाकर शिक्षकों की भर्ती में अतिथि शिक्षकों को उम्र छूट और उनके अनुभव को नंबर के तौर पर वेटेज देने का प्रस्ताव जनवरी में उपराज्यपाल को भेजा था।
जो सवाल उपराज्यपाल की तरफ से पूछे गए, उसका जवाब भी सरकार ने दिया, लेकिन आज तक प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई। सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा के लिए काम करने वाले अतिथि शिक्षकों को आयु छूट और अनुभव के नंबर देने की पॉलिसी बनाई।
इसमें अधिकतम 2.25 अंक का फायदा भर्ती में इन शिक्षकों को मिलना है। 17 हजार शिक्षक हैं, जिनका भविष्य अधर में है और फिर बच्चों को स्थायी शिक्षक मिल सकेंगे, लेकिन गुणवत्ता शिक्षा के लिए नीति जरूरी है। इस पॉलिसी को जनवरी से उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच फाइल आ और जा रही है। दो बार जवाब भी दे चुके हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, आखिर उपराज्यपाल इसे स्वीकृति क्यों नहीं दे रहे हैं? वो अनुभव को वेटेज देने के फार्मूले से सहमत नहीं हैं। आखिर अनुभव का फायदा मिलना चाहिए। मैं खुद भी बात कर चुका हूं। केंद्र सरकार की भर्ती एजेंसी से बातचीत हो चुकी है। जैसे ही उपराज्यपाल से स्वीकृति मिलेगी, भर्ती शुरू हो जाएगी।