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अधिकारों की जंगः केजरीवाल ने डीसीडब्ल्यू सदस्य सचिव की नियुक्ति को बताया अवैध

Mon, 28 Nov 2016 03:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नजीब जंग और केजरीवाल
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच फिर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। नया मामला दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) में सदस्य सचिव की नियुक्ति का है।
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केजरीवाल ने उपराज्यपाल को एक पत्र भेजकर महिला आयोग में सदस्य सचिव के तौर पर अलका दीवान की नियुक्ति को अवैध करार दिया है। साथ ही उपराज्यपाल से मांग की है कि सदस्य सचिव की नियुक्ति वापस लें, क्योंकि नियुक्ति असंवैधानिक है। यह उच्च न्यायालय के आदेश के भी खिलाफ है।

अरविंद केजरीवाल ने नजीब जंग को भेजे गए नोट में लिखा है कि मैं सदस्य सचिव के तौर पर अलका दीवान की पार्ट टाइम नियुक्ति को रद्द करके इनकी नियुक्ति वापस लेने की सिफारिश कर रहा हूं।
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इतना ही नहीं भविष्य में दिल्ली महिला आयोग में सदस्य सचिव की नियुक्ति चुनी गई सरकार की नामित को ही किया जाए। पूर्व में भी ऐसी परंपरा रही है। बिना चुनी गई सरकार की सिफारिश के सदस्य सचिव नियुक्त किए जाने की वजह से आयोग की स्वायत्तता खतरे में है।
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केजरीवाल बोले- अलका दीवान काम में बाधा डाल रही हैं

नजीब जंग और केजरीवाल
दिल्ली महिला आयोग की तरफ से अरविंद केजरीवाल के हस्ताक्षर वाले जारी नोट के अनुसार आयोग की अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को दस पेज का नोट भेजकर यह शिकायत की थी अलका दीवान काम में बाधा डाल रही हैं। अनुबंध पर तैनात तेजाब पीड़ित, बेसहारा, जो कर्मचारी-अधिकारी यहां काम कर रहे हैं, उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं दिया गया।

केजरीवाल ने लिखा है कि महिला आयोग सरकार से तुरंत सहयोग चाहती है, तो फिर सरकार की प्राधिकारी उस पर सवाल कैसे लगा सकती है? महिला आयोग कई बार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की भूमिका की जांच भी करती है। उसके प्रशासक भी उपराज्यपाल हैं, तो फिर उपराज्यपाल की तरफ से नियुक्त सदस्य सही परिणाम कैसे दे सकती हैं?

इससे पूर्व मुख्यमंत्री को भेजे गए नोट में महिला आयोग की अध्यक्ष ने लिखा था कि अलका दीवान पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अतिरिक्त सचिव रह चुकी हैं। उस दौरान भी महिला आयोग में भ्रष्टाचार हुए। दो महीने पहले भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में सबूत के साथ शिकायत की है।

अब उनकी नियुक्ति भी गलत तरीके से है। इस पद पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की नियुक्ति होती है, जिन्हें संबंधित विषय की जानकारी हो। महिला आयोग अध्यक्ष ने यहां तक आरोप लगाए हैं कि जानकारी का अभाव ही नहीं है, बल्कि पीड़ित महिलाओं के लिए इनके मन में सहानुभूति भी नहीं है।
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