दिल्लीवासियों की सुविधा के लिए मंगलवार को जहां हाइड्रोलिक लिफ्ट, पैनिक बटन, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरों से लैस क्लस्टर स्कीम की 25 नई बसों को सड़क पर उतारा गया वहीं, इन बसों के सड़क पर उतरने के पहले ही दिन मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन किया गया।
राजघाट डिपो से इन बसों को हरी झंडी दिखाने के बाद बस रूट संख्या-534 और 543 पर उतार दिया गया। राजघाट से आईपी डिपो तक इन बसों में सफर के दौरान खुलासा हुआ कि बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो थे, लेकिन उनमें कोई दवाई नहीं थी।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इन बसों की खासियतों की तारीफ करने के बाद रूटों पर रवाना कर दिया। सभी बसें राजघाट डिपो से निकलती हुई अपने पहले बस स्टॉप आईपी डिपो पर पहुंची। चलती हुई बस में जब फर्स्ट एड बॉक्स देखा तो उसमें दवाइयां ही नहीं थीं।
इस संबंध में बस चालक से बात की गई तो उसने बताया कि उसे मंगलवार को ही इस बस पर भेजा गया। बॉक्स में दवाइयां नहीं हैं, इसकी उसे जानकारी नहीं थी। आईपी डिपो से इन बसों में यात्री भी बैठाने शुरू कर दिए गए।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी सार्वजनिक वाहन को फर्स्ट एड बॉक्स के बिना सड़क पर उतारना मोटर वाहन एक्ट का उल्लंघन है। इन बसों में यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई गई हाइड्रोलिक लिफ्ट, पैनिक बटन, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरों की सुविधा तो यात्रियों के लिए बेहतर है, लेकिन फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां ना रखना परिवहन सिस्टम पर सवाल उठाता है और यात्रियों के प्रति लापरवाही दर्शाता है।