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संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने राम मंदिर पर केंद्र को दिया अल्टीमेटम, कहा- भीख नहीं मांग रहे

Sun, 09 Dec 2018 11:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विराट धर्म सभा - फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर रामलीला मैदान में विहिप की धर्मसभा में जुटे साधु-संतों और दो लाख से ज्यादा लोगों के बीच संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने दो टूक कहा कि हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे हैं। सरकार अपने अधूरे संकल्प को पूरा करने के लिए हिचक छोड़कर कानून बनाए। 
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शीर्ष अदालत और सरकार को लोगों की भावनाओं का ख्याल रखने की नसीहत देते हुए भैयाजी जोशी ने रविवार को कहा कि राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करना आप दोनों का कर्तव्य है। धर्मसभा में पहुंचे अन्य साधु-संतों ने भी केंद्र सरकार को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक दो दिन पहले जुटी इस महासभा में संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि आज सत्ता में बैठे लोगों ने ही पहले ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ की घोषणा की थी। राम मंदिर निर्माण उनका भी संकल्प है। अब संकल्प पूरा करने का समय आ गया है। हम भीख नहीं मांग रहे हैं। हम जनभावनाएं बता रहे हैं। देश राम मंदिर निर्माण चाहता है। अब सरकार को बिना झिझक अपना संकल्प पूरा करना चाहिए। 1992 में अधूरे छोड़े काम को पूरा करने का समय आ गया है। सरकार में बैठे लोगों को समझना चाहिए कि जनभावनाओं का सम्मान करना भी उनका कर्तव्य है।
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जोशी ने कहा कि हिंदू समाज संघर्ष नहीं चाहता। अगर हम संघर्ष चाहते तो इतने साल तक इंतजार नहीं करते। राम मंदिर को किसी संप्रदाय से जोड़कर देखना गलत होगा। सच्चाई यह है कि राम मंदिर के निर्माण से ही देश में रामराज्य की नींव पड़ेगी। देश में गुलामी के प्रतीक माने जाने वालों के निशान पूरी तरह से मिटाए जाने चाहिए। 

 
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शीर्ष अदालत पर हमला

विराट धर्म सभा - फोटो : अमर उजाला
संघ के सरकार्यवाह ने राम मंदिर मामले की सुनवाई टालने पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत लोगों की भावनाओं को समझे। न्यायपालिका के प्रति अविश्वास का वातावरण ठीक नहीं है। इस पर उसे ही विचार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर सुनवाई जनवरी, 2019 तक टाल दी है।

रामलला टाट में, बातें करने वाले ठाठ में: ऋतंभरा 
धर्मसभा में साध्वी ऋतंभरा ने कानून या अध्यादेश के रास्ते राम मंदिर निर्माण की बात कही। उन्होंने व्यंग्य किया कि इस समय राम मंदिर की बात करने वाले ठाठ में हैं, जबकि रामलला टाट में हैं। अयोध्या में कितने भी आयोजन कर लो, सरयू के तट पर दीप जला लो, प्रभु राम की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने की बात कर लो, लेकिन वहां जब तक प्रभु राम का भव्य मंदिर नहीं बनेगा, तब तक सारे प्रयास अधूरे माने जाएंगे।

100 से ज्यादा संगठनों ने धर्मसभा में की शिरकत
विहिप की धर्मसभा में 100 से ज्यादा संगठन के लोगों ने शिरकत कर कानून के जरिये राम मंदिर निर्माण की मांग की। इनमें साध्वी ऋतंभरा, महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जगतगुरु हंसदेवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज, विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार और वीएस कोगजे ने सभा को संबोधित किया। 

राम मंदिर के लिए अभियान जारी रखेगी विहिप 
विहिप ने मंदिर निर्माण के पिछले चरण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्य के राज्यपालों से मुलाकात की थी। अगले चरण में मंदिरों और मठों में धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना की जाएगी। यह अभियान प्रयाग में साधु-संतों की धर्म संसद के साथ पूरा होगा। अंतिम धर्म संसद 31 जनवरी और 1 फरवरी को होगी।

‘पूरा विश्वास है कि सरकार इसी सत्र में मंदिर निर्माण का मार्ग ख्रोज लेगी। सरकार ही नहीं, दूसरे दल भी समर्थन के लिए मजबूर होंगे। राजनीतिज्ञों को पता है कि लोगों की भावनाओं का सम्मान नहीं करने का क्या परिणाम आता है।’ 
- विनोद बंसल, प्रवक्ता, विहिप

‘सारा देश रामलीला मैदान में राम मंदिर निर्माण की मांग पर जमा हुए जनसैलाब को देख रहा है। सरकार लोगों की भावनाओं का सम्मान करेगी।’ 
- शाहनवाज हुसैन, प्रवक्ता भाजपा

‘यह धारणा ही गलत है कि हम मस्जिद की जगह मंदिर बनाना चाहते हैं। मस्जिद को मंदिर गिराकर बनाया गया था। राम मंदिर की मांग चुनावी मुद्दा नहीं है। देश में हर छह महीने में चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में क्या हम चुपचाप बैठे रहें।’ 
- वीएस कोगजे, अध्यक्ष, विहिप

‘हिंदू समाज दशकों की प्रतीक्षा के बाद अब इंतजार के मूड में नहीं है। अब किसी में राम मंदिर का विरोध करने का दम भी नहीं है। राम मंदिर निर्माण में बाधा बनने वाले दल या संगठन को जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। सरकार अध्यादेश के जरिये राम मंदिर निर्माण का रास्ता निकाले।’ 
- आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, विहिप
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