मोबाइल और तकनीक से किशोरों के आंखों से नींद गायब हो रही है। रातों को इन्हें सही से नींद नहीं आती। नींद टूटने पर वाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल साइट्स पर नजर डालते हैं।
खराब नींद की वजह से उनकी दिनचर्या बिगड़ भी रही है। ऐसे किशोरों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह खुलासा फोर्टिस अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारिक विज्ञान विभाग द्वारा किए गए शोध में सामने आया है।
विभाग के निदेशक डॉ. समीर पारिख द्वारा दिल्ली-एनसीआर के 550 स्कूल गोइंग छात्रों के बीच शोध किया गया। इसमें उन्होंने पाया कि 22 फीसदी किशोर हमेशा रात में उठते हैं और अपना मोबाइल चेक करते हैं।
जबकि, 48 फीसदी कभी-कभार उठकर ऐसा करते हैं। जबकि 21 फीसदी किशोरों को फोन की वजह से उठना होता है और फिर मोबाइल चेक करते हैं।