दिल्ली सरकार ने अलग-अलग काम के लिए जिन एजेंसियों को खर्च के लिए पैसे दिए उन्होंने हिसाब-किताब नहीं दिए। एक साल में राशि खर्च का उपयोग प्रमाणपत्र लेना होता है।
लेकिन दो से दस साल तक के 3761 मामले में 17,720 करोड़ रुपये का उपयोग प्रमाणपत्र नहीं लिया गया। कई मामलों में देरी से उपयोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के कारण समुचित उपयोग सुनिश्चित नहीं किया जा सका। ये खुलासा कैग की रिपोर्ट से हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन 3761 मामले में उपयोग प्रमाण पत्र नहीं लिए गए हैं, उसमें 4226 करोड़ रुपये तो दस साल से भी पहले दिए गए गए थे। इनका अभी तक संबंधित एजेंसियों ने किस तरीके से उपयोग किया, इसकी जानकारी नहीं दी।
वहीं 9 निकायों में से तीन का 2013-14 तक का बकाया 16 वार्षिक लेखे में नहीं मिले थे। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार के विभागों ने दुरुपयोग, हानि, चोरी, गबन के 24 मामलों की सूचना दी थी, जिसमें मार्च, 2015 तक 23.3 लाख रुपये की सार्वजनिक राशि सम्मिलित थी। लेखा परीक्षा में दिल्ली सरकार के 255 करोड़ रुपये की राशि का पता चला, जो सस्पेंस अकाउंट में बकाया था जबकि इनका तुरंत निपटान और उपयुक्त लेखा शीर्ष में वर्गीकरण किया जाना आवश्यक था।