संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में हिन्दी समेत अन्य क्षेत्रीय भाषा के छात्रों की अनदेखी के विरोध में चल रहा परीक्षार्थियों का धरना पीएमओ के आश्वासन के बाद टल गया। सी-सैट के विरोध में बृहस्पतिवार को पैदल मार्च कर रेसकोर्स मेट्रो स्टेशन पहुंचे छात्र शुक्रवार रात तक सड़क पर ही बैठे रहे। शनिवार सुबह पांच बजे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया लेकिन पीएमओ से वार्ता का बुलावा आने पर दोपहर में उन्हें छोड़ दिया गया।
देशभर से राजधानी पहुंचे यूपीएससी परीक्षा के हिन्दी समेत क्षेत्रीय भाषाओं के छात्र रेसकोर्स मेट्रो स्टेशन के बाहर पहुंचने में कामयाब हो गए थे। छात्रों ने स्टेशन के गेट नंबर दो पर कब्जा करते हुए बीच सड़क पर धरना दे दिया। रातभर पुलिस छात्रों को सड़क से हटाने का प्रयास करती रही, लेकिन वे प्रधानमंत्री को मांग पत्र दिए बगैर हटने के लिए तैयार नहीं थे।
सुबह लिए गए हिरासत में
शनिवार सुबह पांच बजे पुलिस सैकड़ों छात्रों को हिरासत में ले कर तुगलक रोड थाने और पार्लियामेंट स्ट्रीट ले गई। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को मिलने की इजाजत आने पर उन्हें छोड़ दिया गया।
छात्रों द्वारा गठित यूपीएससी कार्यकारी समिति के सदस्य विवेक के मुताबिक, दोपहर दो बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में सांसद रामेश्वर चौहान ने उनका मांग पत्र लिया। चौहान ने उन्हें सोमवार को दोबारा मिलने के लिए बुलाया है।
उन्होंने समस्या के समाधाना का आश्वासन दिया है। वहीं, राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने भरोसा दिलाया है कि यूपीएससी को सी-सैट मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने का निर्देश दिया जाएगा।
ये हैं वो शब्द
कमेटी के सदस्य विवेक, संजीव, अंगेश व रोहित के मुताबिक, वर्ष 2013 की परीक्षा में उनसे इस प्रकार प्रश्न पूछे गए थे, जिनकी अंग्रेजी कुछ थी, और हिंदी अनुवाद कुछ अलग। छात्रों के मुताबिक, इन्हीं अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद में वे 112 नंबरों में अटक जाते हैं। कुछ उदाहरण पेश हैं।
प्रश्न नंबर 8 - अंग्रेजी में लिखा था - लैंड रिफॉर्म
हिंदी अनुवाद - अर्थव्यवस्था में सुधार
प्रश्न नंबर 9 - सप्लाई चेन मैनेजमेंट
हिन्दी अनुवाद - कुछ भी नहीं लिखा था।
प्रश्न नंबर 9बी - अंग्रेजी में लिखा था-ज्वाइंट वेंचर
हिंदी अनुवाद - संयुक्त संविधान मार्ग
प्रश्न नंबर 19 में अंग्रेजी में प्रश्न के आखिर में गो और नो गो जोन लिखा था ।
हिंदी अनुवाद - अवैध खनन के क्या परिणाम होते हैं? कोयला खनन क्षेत्र के लिए पर्यावरण व वन मंत्रालय के हां या न की अवधारणा की विवेचना कीजिए।