दिल्ली की अदालत ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में आरोपी भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर पर नए सिरे से पॉक्सो की संबंधित धारा में आरोप तय करने का निर्देश दिया हैं। अदालत ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि सेंगर विधायक हैं और राजकीय कर्मचारी की श्रेणी में आते हैं।
सेंगर के खिलाफ अब लोकसेवक द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म का केस भी चलेगा। इस धारा में दोषी पाए जाने पर न्यूनतम दस वर्ष की कैद का प्रावधान है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता की हालत पर सीबीआई को सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब मामले की सुनवाई बंद कमरे में होगी और मीडिया के मौजूद रहने पर रोक रहेगी।
तीस हजारी अदालत के जिला व सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने आरोपों में परिवर्तन करते हुए कहा कि राजकीय कर्मचारी को व्यापक अर्थ में समझने की जरूरत है। इसका आशय शक्ति, अधिकार अथवा विश्वास से है। अगर कोई विधायक किसी नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी पाया जाता है तो उस पर पॉक्सो की संबंधित धारा 5(सी) व 6 के तहत आरोप तय किया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सेंगर व सह आरोपी शशि सिंह के खिलाफ पॉक्सो की धारा 3 व 4 के तहत आरोप तय किए थे। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।