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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत मामलाः होईकोर्ट ने सीबीआई को दिया और दो सप्ताह का समय

Mon, 23 Nov 2020 07:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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कुलदीप सेंगर - फोटो : ANI
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दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की अपील पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सीबीआई को और समय दे दिया है। इस याचिका में सेंगर उनकी सजा और 10 साल कैद के आदेश को चुनौती दी है।

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न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। इसके बाद पीठ मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी। इससे पहले पीठ ने सेंगर की अपील पर छह नवंबर को सीबीआई को नोटिस जारी किया था। पीठ ने सेंगर के आवेदन पर जवाब मांगा था।

सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने स्थिति रिपोर्ट दायर करने के लिए और समय मांगा तथा कहा कि मामले के जांच अधिकारी हाथरस कांड से संबंधित मामले की जांच भी कर रहे हैं, जिसके चलते वह जवाब दायर नहीं कर सके। सेंगर की ओर से पेश वकील कन्हैया सिंघल ने कहा कि सजा को निलंबित करने का उनका मजबूत मामला है और सीबीआई के जवाब दाखिल करने के बाद वह अपनी दलीलें पेश करेंगे।
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उन्नाव में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में सेंगर को जीवन के अंतिम समय तक कारावास की सजा सुनाई गई है। मामले में सेंगर को दोषी ठहराए जाने के बाद 25 फरवरी को उतर प्रदेश विधानसभा में सेंगर की सदस्यता निरस्त कर दी गई थी।

दुष्कर्म पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर आम्र्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और हिरासत में पुलिस की ज्यादती के चलते नौ अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई थी। हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत के मामले में निचली अदालत ने 4 मार्च को सेंगर, उसके भाई और पांच अन्यों को दोषी ठहराया था।

कोर्ट ने 13 मार्च को उन्हें 10 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। निचली अदालत ने सेंगर पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। सेंगर ने उन्हें सुनाई गई सजा के निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग की है। उसने अपनी अपील में कहा है, निष्पक्ष मुकदमे के लिए आवश्यक है कि जांच एजेंसी, अभियोजन और गवाह अदालत के समक्ष सच्चे तथ्य पेश करें और फिर वह अदालत, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मुकदमा सुनिश्चित करे।

पीड़िता के पिता की मौत के मामले में दस साल कैद की सजा के साथ ही सेंगर, उसके भाई, उन्नाव में माखी थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन उपनिरीक्षक के पी सिंह, विनीत मिश्रा, बीरेंद्र सिंह और शशि प्रताप सिंह को अन्य अपराधों में भी सजा सुनाई गई है।

उन्हें आपराधिक साजिश, झूठे साक्ष्य, अपराध होने के संबंध में झूठी सूचना देने, अपराध के साक्ष्यों को मिटाने आदि के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। नाबालिग लड़की से 2017 में हुए दुष्कर्म के मामले में सेंगर को पिछले साल 20 दिसंबर को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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