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Delhi: यूजीसी काउंसिल ने कॉलेजों को स्वायत्त बनने के संशोधन नियम को मंजूरी, पुराने व नए नियम में ये बड़ा बदलाव

Mon, 10 Oct 2022 02:07 PM IST
शाहरुख खान सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वायत्त कॉलेज यूजी व पीजी प्रोग्राम शुरू करने के साथ अपने नियम से दाखिला कर सकेंगे। यूजीसी चेयरमैन ने कहा, यूजीसी काउंसिल ने कॉलेजों के स्वायत्त बनने के संशोधित रैग्यूलेशन 2022 को मंजूरी दे दी है।
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यूजीसी के चेयरमैन एम जगदीश कुमार - फोटो : Twitter
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विस्तार
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अब नैक में 3.0 ग्रेड और तीन प्रोग्राम में एनबीए स्कोर 675 होने पर कॉलेजों को स्वायत्त( ऑटोनॉमस )  का दर्जा मिल सकेगा।  यूजीसी काउंसिल ने कॉलेजों के स्वायत्त बनने के संशोधित रैग्यूलेशन 2022 को मंजूरी दे दी है। स्वायत्त कॉलेज अपनी मर्जी से  बिना किसी मंजूरी स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम और नए कोर्स शुरू कर सकेंगे। 
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अपने नियमों से दाखिला देने के अलावा  पाठ्यक्रम और कोर्स में बदलाव करने की भी आजादी मिलेगी। नए नियम के तहत स्वायत्त कॉलेज अब पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई भी करवा सकेंगे, लेकिन उन्हें अपने मान्यता देने वाले विश्वविद्यालयों से इसके लिए मंजूरी लेनी होगी। यूजीसी कॉलेजों को स्वायत्तता देने वाले संशोधित रैग्यूलेशन को मंगलवार को राज्यों और विश्वविद्यालयों से साझा करेगी। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने बताया कि कॉलेजों को स्वायत्ता देने संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी) 2020 की सिफारिशों में कॉलेजों को स्वायत्तता देना भी शामिल था। यूजीसी काउंसिल की बैठक में यूजीसी( महाविद्यालयों को स्वायत्तता का दर्जा प्रदान करने और स्वायत्त महाविद्यालयों में मानकों के रखरखाव संबंधी उपाय) विनियम 2022 को मंजूरी दी गयी है। नया रैग्यूलेशन यूजीसी रैग्यूलेशन 2018 की जगह आ रहा है। मंगलवार को इस रैग्यूलेशन को राज्यों और विश्वविद्यालयों को भेजा जाएगा, ताकि वे इसके आधार पर आगे काम कर सकें।
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नए नियमों में छात्रों और कॉलेजों दोनों को सबसे अधिक फायदा होगा। कॉलेज अब रैगुलर के साथ ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई शुरू करवा सकेंगे। ऐसे कॉलेज अपनी मर्जी से नए जमाने के मार्केट डिमांड और रोजगार देने वाले यूजी और पीजी प्रोग्राम में नए कोर्स, पाठ्यक्रम में बदलाव आदि कर सकेंगे। इससे छात्रों को नया सीखने का मौका मिलेगा, उन्हें ओर अधिक विषय को जानने का मौका, रोजगार से जुड़्ने और कौशल विकास से खुद को अपग्रेड करने का मौका मिल सकेगा। 
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नियम न मानने पर स्वायत्त का दर्जा वापस

संशोधित नियमों में साफ लिखा है कि कॉलेजों को स्वायत्तता का दर्जा देने का मतलब मनमानी नहीं होगा। वे यूजीसी के तय नियमों के तहत ही नए प्रोग्राम, कोर्स, पाठ्यक्रम में बदलाव से लेकर दाखिले के लिए अपने नियम बनाने की आजादी होगी। यदि कोई स्वायत्त कॉलेज यूजीसी के नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसका स्वायत्तता का दर्जा वापस लेने का भी प्रावधान किया गया है। 

अब पांच की बजाय 10 साल का  स्वायत्त का दर्जा
अभी तक किसी भी कॉलेज को स्वायत्त का दर्जा पांच साल के लिए मिलता था। नए नियमों में यह समयसीमा पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गयी है। यूजीसी रैग्यूलेशन 2022 के जारी होने के बाद कॉलेज इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। संबंधित मान्यता देने वाली यूनिवर्सिटी कॉलेजों के जानकारियां की जांच करेगी। इसके आधार पर वे कॉलेज की सिफारिश कर सकेंगे। कॉलेज को स्वायत्त का दर्जा मिलने के तीन साल के अंदर सभी यूजीसी नियमों को पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि कोई स्वायत्त कॉलेज लगातार बेहतर प्रदर्शन करता है तो फिर 10 साल के बाद दूसरी टर्म में 15 साल तक के लिए स्वायत्त का दर्जा मिलेगा। लगातार दो बार स्वायत्तता का दर्जा हासिल करने वाले कॉलेज हमेशा के लिए स्वायत्तता का दर्जा हासिल कर लेंगे। 

पुराने और नए नियम में यह बड़ा बदलाव
अभी तक नैक 3.26 ग्रेड और एनआईआरएफ रैकिंग में लगातार दो बार 100 में शामिल कॉलेज स्वायत्ता का दर्जा से लेकर ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकते थे। हालांकि नए नियमों में नैक 3.26 की बजाय 3.0 को रखा गया है। वहीं, अब एनआईआरएफ रैकिंग की बजाय एनबीए में लगातार तीन प्रोग्राम में 675 स्कोर हासिल करने वाले कॉलेजों को इस रेस में शामिल होने की मंजूरी मिली है। वहीं, शिक्षक, प्रिंसिपल भर्ती के लिए यूजीसी द्वारा तय नियमों का ही पालन किया जाएगा, इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। 
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