विशेषज्ञों की माने तो दोनों मामलों में दिल से जुड़े रोग का कोई न कोई लक्षण रहा होगा। समय रहते उन लक्षणों पर ध्यान नहीं देने से समस्या बढ़ गई होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक या अक्सर बिना किसी चेतावनी के अचानक कार्डियक अरेस्ट होता है। यह हृदय में विद्युतीय खराबी के कारण होता है। इसके पीछे अनियमित दिल की धड़कन कारण बनती है। दिल की पंपिंग क्रिया बाधित होने से दिल, मस्तिष्क, फेफड़ों और अन्य अंगों में दिल रक्त पंप नहीं कर पाता। इसके कुछ सेकंड बाद व्यक्ति बेहोश हो जाता है। उसकी नाड़ी नहीं चलती। ऐसे व्यक्ति को यदि समय रहते उपचार न मिले तो कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है।
अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान व डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार का कहना है कि अचानक कार्डियक अरेस्ट और दिल का दौरा दो अलग क्रिया है। अचानक कार्डियक अरेस्ट के पिछले 90 फीसदी दिल के दौरे का ही लक्षण रहता है। 10 फीसदी में कार्डियोमायोपैथी (मांसपेशियों का मोटा होना) सहित दूसरे कारण हो सकते हैं।
यह रखें अपना विशेष ध्यान
- मधुमेह रोगी
- धूम्रपान करने वाले
- मोटापा के मरीज
- कोलेस्ट्रॉल
- उच्च रक्तचाप
- परिवार में पहले किसी को दिल का रोग रहा हो
- कम शारीरिक क्रिया करने वाले
अचानक मामले बढ़ने के पीछे कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक मामले नहीं बढ़े हैं। ऐसे मामले पहले भी आते थे, लेकिन सोशल मीडिया के प्रसार के कारण यह सामने आ रहे हैं। इसके अलावा खराब जीवन शैली व दूसरे कारणों से पिछले कुछ सालों में कार्डियक अरेस्ट-हार्ट अटैक की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
दिल का दौर व अचानक कार्डियक अरेस्ट में अंतर
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। हार्ट अटैक एक रक्त परिसंचरण की समस्या है। इस स्थिति में अवरुद्ध धमनी ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय के एक हिस्से तक पहुंचने में असक्षम हो जाती है। यदि उक्त धमनी को जल्दी से नहीं खोला जाता है, तो हृदय का वह हिस्सा काम करना बंद कर देता है।
अचानक कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय में खराबी आती है और अचानक अप्रत्याशित रूप से धड़कना बंद हो जाता है। अचानक कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिकल समस्या है। यह बिना किसी चेतावनी के होता है। इसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। इस दौरान दिल की पंपिंग क्रिया बाधित होने से दिल, मस्तिष्क, फेफड़ों और अन्य अंगों में दिल रक्त पंप नहीं कर पाता। कुछ सेकंड बाद, व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उसकी नाड़ी नहीं चलती।
हार्ट अटैक के लक्षण
सीने में दर्द, सांस फूलना, पसीना आना सहित अन्य लक्षण दिखते हैं। यह तत्काल और तीव्र हो सकते हैं। हालांकि, अधिकतर लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और दिल का दौरा पड़ने से पहले घंटों, दिनों या सप्ताह तक बने रहते हैं।
क्या करें: हार्ट अटैक
भले ही आपको यकीन न हो कि यह हार्ट अटैक है, अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया नंबर पर कॉल करें या निकटतम चिकित्सा केंद्र पर पहुंचें। हर मिनट मायने रखता है।
क्या करें: अचानक कार्डियक अरेस्ट
अगर कुछ ही मिनटों में इसका इलाज हो जाए तो ज्यादातर पीड़ितों में कार्डियक अरेस्ट ठीक हो सकता है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए कॉल करें और तुरंत सीपीआर दें। तब तक जारी रखें जब तक कि पेशेवर आपातकालीन चिकित्सा सेवा न आ जाए।