राजधानी में गत 30 मई को आई आंधी एवं बारिश एनडीएमसी इलाके में पेड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाली करार दी गई है। एनडीएमसी इलाके में इससे पहले पेड़ों पर आंधी एवं बारिश इस तरह आपदा बनकर नहीं आई थी। एनडीएमसी इलाके में 30 मई को करीब 12 सौ पेड़ों को नुकसान पहुंचा। लिहाजा मनुष्य, पशुओं एवं पक्षियों को छाया देने और प्रदूषण को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे इन पेड़ों के तने और टहने करीब दो लाख किलोग्राम लकड़ी बनकर सड़कों पर गिर गए, जिसे उठाने में एनडीएमसी नाकाम हो गई और उसे दूसरे विभागों की मदद लेने पड़ी।
एनडीएमसी ने गत 30 मई को आई आंधी एवं बारिश और पेड़ों को नुकसान पहुंचने के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार की है। एनडीएमसी ने इस रिपोर्ट में खुलासा किया है कि उस दिन आई आंधी व बारिश पेड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाली साबित हुई। इससे पहले कभी भी आंधी एवं बारिश में इतनी बड़ी संख्या में इतने पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचा था। उस दिन एक भी छोटी-बड़ी सड़क ऐसी नहीं थी जिस पर पेड़ गिरे एवं टूटे नहीं हो।
एनडीएमसी के अनुसार 30 मई को आई आंधी एवं बारिश में 12 सौ पेड़ करीब दो लाख किलोग्राम लकड़ी में तब्दील हो गए। हालांकि इन पेड़ों के टूटे तनों एवं टहनों को तौला नहीं गया है। एनडीएमसी ने अनुमान के अनुसार इतनी लकड़ी होने का दावा किया है। इतना ही नहीं, एनडीएमसी के समक्ष यह लकड़ी उठाने और उसे डालने के लिए समस्या आई। एनडीएमसी ने टूटे पेड़ उठाने के लिए दिल्ली नगर निगम, एनडीआरएफ, एनबीसीसी, एनएचएआई और दिल्ली सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग समेत अन्य विभागों की मदद लेनी पड़ी, वहीं टूरिस्ट पार्क, गुरुद्वारा नर्सरी पार्क, अर्जुन दास कैंप, तालकटोरा गार्डन, पुराना किला रोड नर्सरी, सरोजिनी नगर में एनबीसीसी प्लॉट में इन पेड़ों की लकड़ी डाली गई है। इसके अलावा अस्थायी तौर पर कई सड़कों एवं पार्कों में भी लकड़ी डाली है।
पेड़ टूटने की भरपाई करने की योजना बताई
राजधानी में गत 30 मई को आंधी व बारिश में बड़ी संख्या में पेड़ टूटने की भरपाई करने के लिए एनडीएमसी ने एक योजना तैयार की है। वह इस साल मानसून के दौरान करीब तीन हजार पेड़ों के पौधे लगाएगी। यह पौधे उन्हीं सड़कों व स्थानों पर लगाए जाएगे, जहां 30 मई को आंधी व बारिश ने तबाही मचाई थी। इसके अलावा एनडीएमसी ने पांच लाख झाड़िया भी लगाने का लक्ष्य रखा है। एनडीएमसी का मानना है कि ये झाड़ियों जल्द बड़ी हो जाएगी और ये इलाके में हरियाली करने व प्रदूषण की रोकथाम में कम समय में ही अहम भूमिका निभाएगी।