दिल्ली को बनाना है स्वच्छ और हरित
गहलोत ने कहा कि ई-बसों की बढ़ती संख्या दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। ये बसें न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि यात्रियों के लिए नवीनतम सुरक्षा उपायों और आधुनिक सुविधाओं से भी सुसज्जित हैं।
दिल्ली का सुधरता ट्रांसपोर्ट सिस्टम
इन नई इ-बसों के बाद, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की 4,536 बसें सड़कों पर होंगी, जिसमें 2,966 सीएनजी बसें और 1,570 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जबकि दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मोडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) द्वारा 3,147 बसें संचालित की जाएंगी। इसमें 2,747 सीएनजी और 400 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 320 नई इ-बसें शामिल होने से सड़कों पर अब कुल 1,970 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जो भारत के किसी भी शहर में इलेक्ट्रिक बसों की सबसे अधिक संख्या है। वर्तमान में, दिल्ली के बस बेड़े का 25% हिस्सा इलेक्ट्रिक है। चीन के शहरों के बाद, दिल्ली में सैंटियागो, चिली के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बस बेड़ा है, जिसमें 2,267 इलेक्ट्रिक बसें हैं।
डिपो के विद्युतीकरण में 1500 करोड़ खर्च
मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक बसों के लिए लगभग 60 बस डिपो का विद्युतीकरण कर रही है। वर्तमान में, 18 डिपो पूरी तरह से विद्युतीकृत और चालू हैं। मौजूदा विद्युतीकृत डिपो में मुंडेला कलां, रोहिणी सेक्टर 37, राजघाट-2, मायापुरी, रोहिणी सेक्टर-1, रोहिणी सेक्टर-2, हसनपुर, वजीरपुर, बीबीएम, सुभाष प्लेस, नेहरू प्लेस, रोहिणी सेक्टर-37, बुराड़ी, नारायणा, कालकाजी और सुखदेव विहार (सभी 12-मीटर बसों के लिए) शामिल हैं,जबकि शास्त्री पार्क और मजलिस पार्क 9-मीटर बसों के लिए बनायी गयीं हैं। दिल्ली सरकार डिपो विद्युतीकरण में 1,500 करोड़ से अधिक का निवेश कर रही है।
तीन डिपो से संचालित होंगी
320 इलेक्ट्रिक बसों में से 114 सुखदेव विहार डिपो, 150 कालकाजी डिपो और 120 नारायणा डिपो से संचालित की जाएंगी।