खराब रिश्तों के चलते बेशक पाकिस्तान की ट्रेड फेयर में भागीदारी नहीं है, लेकिन वहां के सूट सलवार का क्रेज बरकरार है। विदेशी पवेलियन के संयुक्त अरब अमीरात के तीन स्टाल पर पाकिस्तानी सूट सलवार की जमकर बिक्री हो रही है। दुकानदार लोगों को बड़े उत्साह से पाकिस्तान के कॉटन लॉन, सिफॉन, बेल्बेट, सिल्क, प्योर क्रेप और जॉरजट के सूट दिखा रहे हैं और उतने ही शौक से लोग इनकी खरीदारी भी कर रहे हैं। प्रगति मैदान में नए हॉल-4 के अंदर विदेशी पवेलियन है। यहां बांग्लादेश, अफगानिस्तान, तुर्की, ईरान समेत दूसरे देशों के स्टाल लगाए गए हैं। सर्वाधिक स्टाल बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हैं। इनके बीच ग्रैंड बाजार इस्तांबुल के ठीक सामने स्टाल पर पाकिस्तानी सूट सलवार मिल रहे हैं। ऐसे ही दो और स्टाल अफगानिस्तान के मेवे की दुकानों के बगल में स्थित हैं।
दुबई होकर दिल्ली आए हैं पाकिस्तानी सूट
ट्रेड फेयर में दुबई होते हुए पाकिस्तानी सूट आए हैं। स्टाल पर मौजूद दरियागंज के फैजान ने बताया कि अभी तो सारा माल दुबई होकर ही आ रहा है। उनके पास पाकिस्तानी सूट सलवार दुपट्टे की करीब 200 से अधिक वैरायटी उपलब्ध है। महिलाएं सीधे आकर पाकिस्तानी सूट दिखाने की मांग करती हैं। मंहगा, सस्ता दोनों तरह का सूट लोगों को पसंद आ रहा है।
ढाई से दस हजार तक का सूट खरीद रहे लोग
पहले स्टाल पर महिला दुकानदार बड़े उत्साह से पाकिस्तानी सूट बेचती नजर आईं, लेकिन पाकिस्तानी सूट के बारे में बात करने में वह संकोच कर रही थीं। जबकि अन्य दुकानदारों ने बताया कि उनके पास 10-12 हजार रुपये तक के पाकिस्तानी सूट सलवार उपलब्ध हैं। डिजाइन और कपड़े की गुणवत्ता के आधार पर इनकी कीमत है।
चेहरे पर हंसी लेकिन अंदर से दिल उदास है
विदेशी पवेलियन में अफगानिस्तान के कई स्टाल हैं। यहां पर मेवे की अनगिनत वैरायटी हैं। इनकी कीमत भी देशी मेवे के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। लेकिन बिक्री जमकर हो रही है। लेकिन अफगानी दुकानदारों ने बताया कि ट्रेड फेयर में भले ही उनके चेहरे पर हंसी और उत्साह दिख रहा है, लेकिन उनका मन भीतर से उदास है। ट्रेड फेयर में भागीदारी कर रहे इनमें से अधिकतर दुकानदार भारत में ही रहते हैं। उम्मेद ने बताया कि अफगानिस्तान में हवाई सेवा बंद है। कार्गो के साथ चक्कर लगाकर वह यहां तक पहुंचे हैं। नावेद ने बताया कि अधिकतर माल ट्रकों के माध्यम से ईरान के रास्ते भारत पहुंच रहा है। ढुलाई का खर्चा कई गुना ज्यादा पड़ रहा है। जिनका कोई भारत में है, वही माल लेकर आ रहे हैं। नेमत ने बताया कि अफगानिस्तान में हालात खराब हैं। दुकान पर मौजूद इनका छोटा भाई मोहम्मद लाजपत नगर डीपीएस में पढ़ता है। मोहम्मद ने कहा कि वह अपने देश जाना चाहते हैं, लेकिन वहां के हालात अभी अच्छे नहीं हैं।
प्रीमियम क्वालिटी बादाम 8,000 रुपये किलो
अफगानिस्तान के प्रीमियम क्वालिटी सफेद बादाम की यहां कीमत 8,000 रुपये किलो है। वहीं सामान्य बादाम भी 4,000 रुपये किलो मिल रहा है। दुकानदारों का दावा है कि उनका प्रीमियम बादाम केवल अफगानिस्तान में मिलता है। इसमें 80% तेल निकलता है।
ढाका की मलमल और जमदानी साड़ियां हिट
बांग्लादेश की राजधानी ढाका से आई मलमल और जमदानी साड़ियां मेले में हिट हैं। दुकानदार मुजीबुर्रहमान ने बताया कि मलमल की साड़ियां 10,000-12,000 रुपये, राजशाही सिल्क 1500-3200 रुपये, बांग्लादेशी बनारसी कातन 3000-7500 रुपये, जूट सिल्क 3,000-10,000 रुपये और ढाका जमदानी की कीमत 22,000 रुपये तक की हैं। इनकी मंहगी साड़ियां पहले ही बिक गई हैं। मंगलवार को उनका नया स्टॉक आने वाला है।