पहले गहरी दोस्ती और फिर दुश्मनी निभाने वाले गैंगस्टर जितेंद्र गोगी और टिल्लू ताजपुरिया का अब सिर्फ नाम ही बचा है। गहरी दोस्ती रखने वाले जितेंद्र और टिल्लू ने कॉलेज की राजनीति में हाथ आजमाने का फैसला किया और यहीं से इनकी दुश्मनी की नींव डल गई, जो एक दूसरे की जान लेकर ही खत्म हुई।
पहले रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या हुई जिसका आरोप टिल्लू पर लगा। अब मंगलवार को गोगी गिरोह के बदमाशों ने टिल्लू की हत्या कर बदला ले लिया। पुलिस के मुताबिक, 12वीं पास करने के बाद ताजपुर गांव निवासी टिल्लू और अलीपुर गांव निवासी गोगी ने स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में स्पोर्ट्स कोटे से दाखिला लिया। कॉलेज में साल 2007 में दोनों की दोस्ती हुई।
दोनों बॉलीबॉल और एथलेटिक्स के खिलाड़ी थे। दोनों नाम कमाने के लिए कॉलेज की राजनीति में उतर गए, लेकिन एक दूसरे से खिलाफ लड़ने के पक्ष में नहीं थे। इसके बावजूद दोनों चुनाव लड़े। बस यहीं से दोनों के बीच संबंध इतने खराब हो गए कि जान के दुश्मन बन गए।
वर्ष 2013 तक दोनों में गैंगवार शुरू हो गई। दोनों गिरोह हत्या, उगाही और लूटपाट करने लगे। इलाके में वर्चस्व के लिए दुश्मनी बढ़ी और एक दूसरे के गिरोह के बदमाशों को ठिकाने लगाने लगे। साल 2015 में गोगी गिरोह ने टिल्लू के साथी दीपक की हत्या कर दी। इसके बाद दोनों गिरोह के 25 बदमाशों की हत्या कर दी गई।
सोनीपत पुलिस ने टिल्लू को गिरफ्तार किया था
साल 2016 में सोनीपत पुलिस ने टिल्लू को हत्या के एक मामले में रोहतक से गिरफ्तार किया था। जेल में उसकी दोस्ती नीरज बवानिया से हो गई। इसके जरिए वह गोगी को रास्ते से हटाना चाहता था। नीरज भी दिल्ली से गोगी का वर्चस्व खत्म करना चाहता था। साल 2018 में गोगी और टिल्लू गिरोह के बीच बुराड़ी में गैंगवार हुई।
इसमें टिल्लू गिरोह के एक बदमाश सहित तीन की मौत हो गई। इसके बाद टिल्लू ने गोगी की हत्या की साजिश रची। साल 2021 में रोहिणी अदालत में पेशी के दौरान गोगी की अदालत में गोली मारकर हत्या कर दी गई। टिल्लू पर गोगी की हत्या करने का आरोप लगा।
सुरक्षा की दृष्टि से मंडोली जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और संपत नेहरा को उस जेल से शिफ्ट कर दिया गया। टिल्लू भी मंडोली जेल में बंद था। इसके बाद सुरक्षा कारणों से टिल्लू को भी तिहाड़ जेल नंबर 8 और 9 के सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट किया गया। अब यहीं उसकी हत्या कर दी गई।