तिहाड़ में बंद आजीवन कारावास पाए कैदी की बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना अब पूरा होगा। क्योंकि जेएनयू के कुलपति प्रो. एसके सोपोरी बेशक जनवरी के आखिर में सेवानिवृत्त हो रहे हों, लेकिन कैंपस से विदाई के बाद भी वे इस बिटिया समेत पिछड़े व निर्धन परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का सेटअप तैयार करके जा रहे हैं, ताकि उनके जाने के बाद मोहनलाल जैसे कैदी या पिता का सपना न टूट जाए।
बेशक वे फरीदाबाद में रहें या फिर यूएस में लेकिन मोहनलाल की बेटी कावेरी को हर महीने स्कूल फीस व अन्य खर्चों के लिए पैसा पहुंचता रहेगा। फिर चाहे वह विदेश जाकर ही उच्च शिक्षा हासिल क्यों न करना चाहती हो।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने कैदी की बेटी, रिक्शा चालक के बेटे, चने बेचने वाले को उच्च शिक्षा से जोड़ने के सपने को अपने वेतन से पैसा देकर पूरा किया है।
मेरी बेटी बेहद होनहार है, लेकिन घर के हालात बेहद दर्दनाक
कुलपति व वैज्ञानिक प्रो. एसके सोपोरी के मुताबिक, 23 नवंबर 2013 को सेंट्रल जेल तिहाड़ संख्या-2 से हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास के कैदी मोहनलाल की चिट्ठी मिली थी।
यह चिट्ठी एक कैदी नहीं, बल्कि एक पिता की थी, जोकि अपनी बिटिया को बड़ा अफसर बनाने का सपना देखता था, लेकिन वक्त की ठोकर ने उसे जेल पहुंचा दिया।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती....। मैं अपनी बेटी को आईएएस या आईपीएस बनाना चाहता हूं, लेकिन जब तक मैं कारागार में हूं, तब तक आप जैसे शिक्षक का सहारा लेना चाहता हूं। मेरी बेटी बेहद होनहार है, लेकिन घर के हालात बेहद दर्दनाक।
कावेरी जहां चाहे उच्च शिक्षा के लिए जा सकती है
इन शब्दों के साथ पिता ने अपने घर के पते के साथ नाम व पता भी लिख दिया था। सोपोरी ने अगले ही दिन दिल्ली स्थित रघुवीर नगर में जाकर कावेरी को तलाशा और फिर शिक्षा से जोड़ दिया।
कावेरी सर्वोदय कन्या महाविद्यालय में सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी। कुलपति ने अपने वेतन से हर महीने कावेरी को दाखिला, ट्यूशन, किताब समेत वर्दी आदि का खर्चा देना शुरू कर दिया। आज कावेरी दसवीं कक्षा में पढ़ती है।
कुलपति ने एनएसएस के डायरेक्टर को भी जिम्मेदारी दी है कि वे कावेरी की पढ़ाई की निगरानी करते रहेंगे। सोपोरी अपना वेतन डायरेक्टर को भेज देंगे और वे जाकर उसकी जरूरत के आधार पर सामान उपलब्ध करवाएंगे। कावेरी जहां चाहे उच्च शिक्षा के लिए जा सकती है। बता दें कि मोहनलाल पत्नी की हत्या के जुर्म में आजीवन कैद की सजा काट रहा है।
मोहनलाल का सपना मैं जरूर पूरा करूंगा
मोहनलाल की दूसरी पत्नी कहती है कि प्रो. सोपोरी हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं। क्योंकि यदि वे मेरी बेटी कावेरी की पढ़ाई का खर्चा नहीं उठाते तो आज वह मेरे साथ कोठियों में बर्तन धोने का ही काम करती।
कावेरी का सारा खर्चा कुलपति उठाते हैं। वे कैंपस से जा रहे हैं, लेकिन हमें भरोसा दिलाया है कि मेरी बेटी की सारी पढ़ाई का खर्चा उठाते रहेंगे।
प्रो एसके सोपोरी कहते हैं कि जेएनयू में इंडोमेंट नाम से सेटअप है, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक अपना वेतन देकर गरीब व मेधावी बच्चों की मदद कर सकते हैं।
हालांकि यह मदद विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने आने वाले छात्रों के लिए ही हैं। मैं कैंपस से जाने के बाद ऐसा एक और सेटअप बनाऊंगा ताकि गरीब बच्चे पैसे के चलते शिक्षा से दूर न हों मोहनलाल का सपना मैं जरूर पूरा करूंगा।