विनोदपुरी की जिस गली में तीनों भाई बहनों ने बचपन में खेलें वहीं से सोमवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। तीनों भाई बहन का शव देखकर आस पास के रहने वाले लोगों की आंखे नम हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद सुबह से ही उनके रिश्तेदारों का घर आने का सिलसिला शुरू हो गया। मोहल्ला में रहने वाले ने बताया कि तीनों ने इसी गली में अपनी जीवन की शुरूआत की थी।
लोगों ने बताया कि सोमवार सुबह चंद्रकला जब शकूरपुर से घर पहुंची तो उसको पता नहीं था कि उनके तीनों बच्चों की मौत हो गई है। उनके रिश्तेदार भी उन्हें बता रहे थे कि उनका ऑपरेशन चल रहा है। कोई भी रिश्तेदार चंद्रकला को यह बताने में डर रहे थे कि उनके तीनों बच्चों की मौत हो चुकी है। साथ ही उन्हें डर था कि तीनों का शव देखने के बाद चंद्रकला इस सदमे को झेल पाएगी या नहीं।
काफी सोच विचार के बाद रिश्तेदारों ने उसे तीनों बच्चों की मौत के बारे में बताया। यह सुनते ही चंद्रकला के मुंह से चीख निकली और वह बेसुध हो गई। लोगों ने बताया कि चंद्रकला के पति धर्मपाल की मौत 25 साल पहले हो गई थी। वह कपड़ों का कारोबार करते थे। उनकी मौत के बाद चंद्रकला ने खुद कारोबार को संभाला। उसने अपने बच्चों को इस काबिल बनाया। जब वह कारोबार संभालने लगे तब वह घर में रहने लगी।