राजधानी में डेंगू के मरीजों व इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। डेंगू पीड़ित एक महिला की लोकनायक अस्पताल, एक किशोर की महाराजा अग्रसेन व एक बुजुर्ग (65) की गंगाराम अस्पताल में मौत होने के बाद अब आंकड़ा 17 तक पहुंच गया है। दिल्ली नगर निगम के मुताबिक, 12 सितंबर तक डेंगू के 1877 मामले सामने आ चुके हैं।
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक वाईके सरीन ने बताया कि सोमवार शाम अस्पताल के आपातकालीन विभाग में उत्तर-पश्चिम दिल्ली निवासी महिला (29) को इलाज के लिए लाया गया था।
कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। इससे पहले निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था जहां डेंगू की पुष्टि हुई थी। इससे पहले 1 सितंबर को 18 वर्षीय व 3 सितंबर को 22 वर्षीय युवक की मौत भी डेंगू से हुई थी और इसकी जानकारी दिल्ली नगर निगम को दी गई है। वहीं, एक किशोर को जिसे महाराजा अग्रसेन अस्पताल में 13 सितंबर को भर्ती कराया गया था, उसने मंगलवार शाम दम तोड़ दिया।
संजीव चतुर्वेदी को भी हो गया डेंगू
दिल्ली नगर निगम के अनुसार भले ही अभी तक राजधानी में डेंगू से पांच मौत हुई हों, लेकिन गैर अधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक डेंगू से 17 मौतें हो चुकी हैं। एम्स में चार, लोकनायक में तीन, लालबहादुर शास्त्री में दो, आरएमएल में दो, होली फैमिली, महाराजा अग्रसेन, गंगाराम में एक-एक व इसके अलावा कुछ अन्य मौतें भी हुई हैं।
एम्स के पूर्व सीवीओ और हाल ही में रमन मैग्ससे अवार्ड जीतने वाले आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भी डेंगू हो गया है। एम्स में हुई जांच में डेंगू की पुष्टि हो गई है।
वे घर पर ही एम्स के चिकित्सकों से इलाज करवा रहे हैं। पांच दिनों से वे बुखार, बदन दर्द और सिर दर्द से परेशान हैं। उनकी प्लेटलेट्स लगातार कम होती जा रही हैं। हालांकि , चिकित्सकों ने अभी भर्ती होने की सलाह नहीं दी है।
एसीबी हेल्पलाइन 1031 डेंगू के लिए भी
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के हेल्पलाइन नंबर 1031 को भी डेंगू के लिए खोल दिया है। अभी तक इस नंबर पर भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें ली जाती थीं।
सोमवार को दिल्ली सरकार ने डेंगू के लिए हेल्पलाइन नंबर 23307145 जारी किया था जो चलता रहेगा। दिल्ली सरकार ने स्कूलों में फुल पैंट-शर्ट व सलवार-कमीज पहनकर आना अनिवार्य कर दिया है।
बच्चे किसी भी रंग के कपड़े पहनकर आ सकते हैं। एक माह के लिए यूनिफार्म की अनिवार्यता नहीं रहेगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के बाद यह फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा है कि निजी अस्पताल इलाज से मना कर रहे हैं। इससे खराब बात कुछ नहीं हो सकती। निजी अस्पताल अगर आपात स्थिति में इलाज या भर्ती से मना करें तो जुर्माना, लाइसेंस रद करने की कार्रवाई की जा सके, इसके लिए ऑप्शन पर सरकार जल्द फैसला लेगी।
जरूरत पड़ी तो विस का विशेष सत्र बुलाकर कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसकी संभावना भी तलाशी जा रही है कि आपात स्थिति में निजी अस्पताल की सेवाएं सरकार टेकओवर कर सके।