सेक्टर-18 के जी ब्लॉक स्थित एक दुकान करीब पांच माह से बंद है। इसके बावजूद दुकान का तीन माह का बिजली का बिल 33 लाख रुपये आ गया। दुकानदार गलत बिल से परेशान हैं। उनके मुताबिक अधिकारी गलत बिल का ठीकरा बिल बनाने वाली निजी कंपनी पर फोड़ रहे हैं।
कर्नल चंद्र प्रकाश ने बताया कि सेक्टर-18 के जी ब्लॉक में उनकी दुकान है, जो खाली पड़ी है। फरवरी तक का बिजली बिल किराएदार भुगतान कर गए थे। बिजली विभाग से बिल न मिलने पर मार्च, अप्रैल और इसके बाद का बिना रीडिंग के आधार पर बिल का भुगतान कर दिया गया था।
बिजली विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि मीटर के स्विच में दिक्कत से बिल नहीं बन पा रहा। अधिशासी अभियंता आरके बंसल ने मैनुअल बिल बनवा दिया। बीते तीन माह का बिल 33 लाख रुपये आया है। उन्होंने बताया कि पहले एक माह का बिल कभी भी 60 हजार से अधिक नहीं आया।
सेक्टर-18 मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके जैन का कहना है कि बिजली विभाग गलत बिल पर रोक नहीं लगा पा रहा, जिस कंपनी को बिल तैयार करने का ठेका दिया है, अधिकारी उसकी गलती ठहरा रहे हैं। कंपनी की यदि गलती है तो उसका ठेका समाप्त क्यों नहीं कर दिया जाता है।