दिल्ली के तीनों मेयर बकाया फंड जारी कराने के लिए सोमवार सुबह सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। बिना वक्त लिए पहुंचे तीनों मेयर से मुख्यमंत्री ने मुलाकात की, लेकिन इस मसले पर बात करने के लिए दोपहर बाद दिल्ली सचिवालय बुलाया।
एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि सकारात्मक माहौल में हुई बातचीत के बाद उत्तरी दिल्ली के मेयर आदेश गुप्ता ने दावा किया कि सीएम ने 7 से 10 दिन में समस्या का ठोस समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद सिविक सेंटर में मीडिया से बातचीत में मेयर आदेश गुप्ता ने कहा कि चार महीने से मुख्यमंत्री से मुलाकात की उनकी कोशिश नाकाम रही थी।
लिहाजा सोमवार को वे मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचकर उनसे मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले पर अधिकारियों के साथ दिल्ली सचिवालय में बैठक होगी।
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आदेश गुप्ता के मुताबिक, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से दिल्ली सचिवालय में मुलाकात हुई। सकारात्मक माहौल में हुई बातचीत में मुख्यमंत्री को एमसीडी के वित्तीय संकट की जानकारी दी गई।
पूरी बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस मसले पर अधिकारियों से चर्चा के लिए 7-10 दिन का वक्त चाहिए। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस समस्या का माकूल समाधान निकाला जाएगा।
मेयरों ने बताई निगमों की हकीकत
मीडिया के सामने तीनों मेयरों में नगर निगम के खस्ताहाल का जिक्र किया। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर नरेंद्र चावला ने बताया कि इस साल शहरी विकास और परिवहन की राशि जारी नहीं हुई है।
बकौल चावला, दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 में 853.93 करोड़े, 2016-17 में 641.56 करोड़ व 2017-18 में 896.33 करोड़ रुपये कम जारी किए हैं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर बिपिन बिहारी सिंह ने बताया कि इस साल शहरी विकास क्षेत्र के तहत आवंटन नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि मार्च 2018 तक के ग्रेच्युटी के दावों को पूरा करने के लिए 124 करोड़ रुपये की तत्काल जरूरत है। वहीं, चौथे वित्तीय आयोग की सिफारिशों के हिसाब से 1005 करोड़ रुपये मिलने चाहिए।
उत्तरी निगम के मेयर आदेश गुप्ता ने बताया कि मासिक वेतन के लिए 295 करोड़ रुपये चाहिए। सरकार से फंड न मिलने से वेतन जारी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम सुधार फंड में 2013-14, 2014-15, 2015-16 की 372 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। वहीं, शहरी विकास और परिवहन क्षेत्र के लिए 1202 करोड़ रुपये चाहिए।