खण्ड़ के अन्तर्गत गांव बावला में डेढ़ वर्ष से जनस्वास्थ्य विभाग का नलकूप खराब है। विद्युत ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण गांव में पेयजल की गंभीर किल्लत बनी हुई है। ग्रामीण संबंधित विभाग के स्थानीय अधिकारियों से लेकर जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों से कई बार फरियाद लगा चुके है।
इसके बाद भी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। इस अनदेखी को लेकर ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष है। अब्दुल वहाब, बिलाल खांन, हनीफ, नजीर, जमील, शमीम, शब्बीर आदि ग्रामीणों ने बताया की गांव के सरकारी स्कूल के समीप जनस्वास्थ्य विभाग के नलकूप पर लगा विद्युत ट्रांसफार्मर करीबन डेढ़ वर्ष से खराब पड़ा है।
इसके कारण गांव में पेयलज की गंभीर किल्लत बनी हुई है। ग्रामीण महिलाएं गर्मी के मौसम में पानी के लिए दर दर की ठोकरे खा रहीं है। ग्रामीणों का कहना है उक्त समस्या को लेकर वह बिजली व जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार समस्या के समाधान की फरियाद लगा चुके है। लेकिन समस्या का हल नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने बताया की करीबन पांच साल पहले गांव में एक बूस्टर टेंक बनाया गया था।
लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते टेंक आज तक चालू नहीं हो पाया है। टेंक पर लगा विद्युत ट्रांसफार्मर भी लंबे समय से खराब है। मरियम, खतीजा, आयशा, अरसीदा, रसीदन व जन्नती आदि महिलाओं ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया की वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने घरों में वह हैंडपंप लगाने में असर्मथ है। पंचायत की और से भी उनके घरो के पास पीने के पानी की कोई व्यव्स्था नहीं की हुई है। उन्होंने बताया की सरकारी नलकूप के पानी के अलावा उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। जनस्वास्थ्य विभाग का बोर नहीं चलने के कारण सबसे अधिक परेशानी से गरीब परिवारों को जूझना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
इस बारे में जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ट अभियतां शकील अहमद ने बताया की नलकूप का विद्युत ट्रांसफार्मर फूंका हुआ है। ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए बिजली विभाग को कई बार लिखा जा चुका है।