दिल्ली को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को ड्रेनेज मास्टर प्लान की समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने जलभराव से छुटकारा दिलाने के लिए सारा कार्य दिल्ली सरकार के हाथों में सौंपने के निर्देश दिए। साथ ही कहा है कि दिल्ली को जलभराव मुक्त करने का प्लान बनाने के लिए सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा इससे जुड़े अन्य बिंदुओं पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।
राजधानी को जलभराव से मुक्त करने के लिए सारा कार्य दिल्ली सरकार अपने हाथों में लेगी। इस संबंध में सभी संबंधित एजेंसियों से जल्द स्वीकृति लेने की पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों को सभी एजेंसियों के अधिकारियों से बात करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को ड्रेनेज मास्टर प्लान के संबंध में समीक्षा बैठक की है। इस दौरान उन्होंने मास्टर प्लान की प्रगति के संबंध में रिपोर्ट मांगी और सलाहकार नियुक्त करने की भी जानकारी ली।
विज्ञापन
सीएम ने जलभराव से मुक्ति का बनाया यह मास्टरप्लान
इस मौके पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने के लिए जलभराव जैसी समस्या का समाधान आवश्यक है। इस दिशा में दिल्ली सरकार तेजी से काम कर रही है और उसने जलभराव से मुक्त करने का सारा काम अपने हाथों में लेने का निर्णय लिया है। दरअसल दिल्ली में कई एजेंसियां हैं, जिनके पास जलभराव मुक्त करने संबंधी काम बंटा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी एजेंसियों से मंजूरी के लिए जल्द बातचीत करें। इसके अलावा जलभराव से मुक्त करने की योजना के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। वह योजना तैयार करके बताएगा कि दिल्ली को किस तरह से जलभराव मुक्त करना है। एक सलाहकार नजफगढ़ ड्रेन का काम संभालेगा। दूसरा सलाहकार यमुना पार और बारापुला का काम देखेगा। वे दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करने के लिए खाका तैयार करेंगे और कार्यान्वयन कार्य की निगरानी भी करेंगे।
विज्ञापन
दिल्ली में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 2846 नालियां
उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या दूर करने के लिए हर नाली और नाले में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इस कड़ी में नालियों के खराब स्लोप और नालियों के मिलने के बारे में मालूम किया जाएगा और नालियों को नालों से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए हर नाली और नाले की अलग-अलग योजना बनेगी। दिल्ली में छोटी-बड़ी करीब 2846 नालियां हैं और इनकी लंबाई करीब 3692 किलोमीटर है। इन नालियों का एक बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पास है और पीडब्ल्यूडी इसका नोडल विभाग भी है। दिल्ली को तीन प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी के तौर पर विभाजित किया गया है। यह तीन जल निकासी क्षेत्र यमुना पार, बारापुला और नजफगढ़ है। इसके अलावा कुछ बहुत छोटे जल निकासी बेसिन अरुणा नगर और चंद्रावल भी है। यह सीधे यमुना में गिरते हैं। बैठक में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पीडब्ल्यूडी सचिव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पीडब्ल्यूडी ने चिन्हित किए 147 जलभराव वाले स्थान
दिल्ली में आम तौर पर मानसून के दौरान प्रतिदिन अधिकतम 25-30 मिमी बारिश होती है, लेकिन पिछले साल 110 मिमी तक बारिश हुई। इस कारण दिल्ली में कई स्थानों पर जलभराव हो गया। पीडब्ल्यूडी सहित सभी विभागों को जलजभराव को रोकने के लिए शार्ट-टर्म व लॉन्ग-टर्म नीतियां तैयार करने व उनके क्रियान्वयन के आदेश दिए थे। इसे देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने 147 स्थानों को चिन्हित कर वहां जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है।