वसंत विहार गैंगरेप मामले में मौत की सजा पा चुके चारों दोषियों को लूटपाट के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने 10 साल कैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर एक लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा यह मामला सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में आम आदमी के भरोसे को तोड़ता है।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीतेश सिंह ने अक्षय कुमार सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता व विनय शर्मा को डकैती, अपहरण, बंधक बनाने संबंधी धाराओं में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई।
इंसान किसी भी खाली बस में चढ़ने से पहले कई बार सोचेगा
अदालत ने चारों दोषियों को अपहरण के लिए सात साल कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। डकैती संबंधी दो धाराओं में 10 साल कैद व 25-25 हजार रुपये जुर्माना व चोरी का सामान रखने के जुर्म में 10 साल कैद व 25-25 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पीड़ित को बंधक बनाने संबंधी धारा में एक साल कैद व एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि रामाधार के साथ लूटपाट का यह मामला हर उस शख्स को प्रभावित करेगा जो अपना निजी वाहन नहीं रख सकता।
कोई भी इंसान सड़क पर चल रही किसी भी खाली बस में चढ़ने से पहले कई बार सोचेगा कि कहीं उसके साथ भी ऐसी वारदात न हो जाए।
इन्होंने युवती से सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया
गैंगरेप की वारदात को अंजाम देने से पहले 16 दिसंबर 2012 को एक नाबालिग समेत छह दोषियों ने कारपेंटर रामाधार को खानपुर ले जाने के लिए अपनी बस में बैठाया था।
इसके बाद दोषियों ने उससे मारपीट व लूटपाट की थी। चारों दोषियों ने उसका मोबाइल व नगदी लूट ली थी और उसके कपड़े फाड़ दिए थे। लूटपाट के बाद दोषियों ने उसे आईआईटी फ्लाईओवर पर चलती बस से फेंक दिया था।
इस वारदात के बाद दोषियों ने 23 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया। अदालत ने लूटपाट मामले में 15 जुलाई 2013 को डकैती, अपहरण व रास्ता रोकने, चोरी का सामान रखने संबंधी धाराओं में आरोप तय किए थे। आरोपियों ने मुकदमा लड़ने का फैसला किया था।