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दिल्ली: डीजल वाहनों पर रोक से इन शहरों को होगा फायदा

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राजधानी में नई डीजल कारों के रजिस्ट्रेशन पर रोक से एनसीआर में आने वाले शहरों का राजस्व बढ़ेगा। डीजल कारों के शौकीन अब उसके रजिस्ट्रेशन के लिए एनसीआर की ओर रुख करेंगे।
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यही नहीं राजधानी में बड़ी कंपनियों के शोरूम की बिक्री पर भी असर पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन और वाहनों की बिक्री से दिल्ली सरकार को मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ेगा। हालांकि इससे खरीदार को फायदा होगा। क्योंकि एनसीआर रजिस्ट्रेशन चार्ज भी कम है।

राजधानी में रोजाना करीब 1300 से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। इसमें सभी तरह के वाहन शामिल हैं। इसमें करीब दस फीसदी डीजल वाहन होते हैं। दिल्ली में कारों के शौकीन डीजल से चलने वाली बड़ी कारों को ज्यादा पसंद करते है।
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डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक से लोग एनसीआर जाएंगे

जिस कार की कीमत 10 लाख या इससे ज्यादा होती है, उससे दिल्ली सरकार को वाहन के एक्स शोरूम प्राइस पर 12.5 फीसदी का टैक्स मिलता है। अगर वाहन 6 से 10 लाख के बीच का है तो उस पर 8.75 फीसदी रजिस्ट्रेशन चार्ज लगता है। पार्किंग चार्ज अलग से लगता है।

मगर अब नए डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक से लोग एनसीआर जाएंगे। इससे शोरूम की बिक्री भी घटेगी जिससे सरकार को मिलने वाले वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) कलेक्शन में भी कमी आएगी।

एनसीआर में आने वाले नोएडा और गाजियाबाद में एक्स शोरूम प्राइस पर महज आठ फीसदी रजिस्ट्रेशन चार्ज लगता है और 15 सौ रुपये अतिरिक्त चार्ज लगता है।
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दिल्ली सरकार के राजस्व को नुकसान

इसी तरह फरीदाबाद गुड़गांव में 6-20 लाख तक के वाहन पर आठ फीसदी जबकि 20 लाख से ज्यादा दाम वाले वाहन पर 10 फीसदी टैक्स लगता है।

जानकारों का कहना है कि डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक से दिल्ली सरकार के राजस्व नुकसान होगा ही साथ ही इससे पर्यावरण को फायदा होगा यह जरूरी नहीं है।

क्योंकि एनसीआर से आने वाले डीजल वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक नहीं लगेगी। वाहन चालक एनसीआर में रजिस्ट्रेशन कराएगा मगर चलाएगा दिल्ली में।
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