शहर में बन रहे बिल्डिंगों के फ्लैट अब ज्यादा सुरक्षित होंगे। दरअसल सेक्टर-45 में निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने के बाद हाईराइज बिल्डिंगों की गुणवत्ता पर प्राधिकरण की नींद टूटी है। आईआईटी प्रोफेसरों की मदद से इन बिल्डिंगों की गुणवत्ता परखने का निर्णय लिया गया है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में हाईराइज बिल्डिंगों की लचर गुणवत्ता को लेकर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। खासकर फ्लैटों के मामले में काफी शिकायतें प्राधिकरण को मिल चुकी हैं। कंस्ट्रक्शन मैटेरियल हो या फिर फिनिशंग वर्क, सबसे सस्ता सामान लगाने की जुगत में रहते हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई बिल्डरों की हाईराइज बिल्डिंग में खराब गुणवत्ता की पोल खुल चुकी है। सोशल मीडिया पर भी वीडियो चल चुके हैं।
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन और नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स एंड मेंबर्स एसोसिएशन सहित कई संगठन इसकी शिकायत नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से पहले भी कर चुके हैं, मगर प्राधिकरणों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
हर बार यही जवाब मिला कि गुणवत्ता जांचने के लिए विशेषज्ञों की कोई टीम प्राधिकरण के पास नहीं है। कंपलीशन देते समय प्राधिकरण कर्मी ही औपचारिकता पूरी कर लेते हैं। मगर हाल ही में सेक्टर-45 में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग का छज्जा गिर गया। हादसे में इंजीनियर सहित दो लोग जख्मी हो गए, तब जाकर गुणवत्ता पर प्राधिकरण का ध्यान गया है।
दो दिन पहले नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण ने समीक्षा बैठक की, जिसमें बिल्डरों की बिल्डिंग की गुणवत्ता जांचने का निर्णय लिया गया। यह तय हुआ, कि आईआईटी दिल्ली या रुड़की के सेवानिवृत्त प्रोफेसर की निगरानी में कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी समय-समय पर गुणवत्ता जांचने का काम करेगी।
नोएडा की तर्ज पर ग्रेटर नोएडा में भी इसी कमेटी से जांच कराई जा सकती है। इसका खर्च भी बिल्डरों पर ही डालने की तैयारी है। चेयरमैन ने इस कमेटी का बहुत जल्द गठन करने का निर्देश दिया है।