सामाजिक मंच पर भले बेटों-बेटियों को लोग एक समान मानने का दावा करते हों, लेकिन गाजियाबाद में हकीकत इससे जुदा है। विगत 15 माह के आंकडे़ बडे़ ही चौंकाने वाले हैं।
हर माह लड़का-लड़की की संख्या का अंतर यहां बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे ही रहा तो अब नवरात्र में कन्याओं की जगह लांगुरों को जिमाना पड़ेगा।
देश में सबसे कम सेक्स रेशियो वाले हरियाणा राज्य और चंडीगढ़ सिटी से भी बदतर गाजियाबाद की स्थिति की है। जनवरी 14 से अब तक गाजियाबाद में जहां 20019 लड़कों ने जन्म लिया, वहीं लड़कियों की संख्या मात्र 13806 ही रही।
यह हाल तब है जब महानगर की बेटियां खेल से लेकर शिक्षा और बॉलीवुड तक में गाजियाबाद का नाम रोशन कर रहीं हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा राज्य में 1000 लड़कों पर 879 लड़कियां थीं।
गाजियाबाद का पिछले 15 माह का आंकड़ा बताता है कि यहां 1000 लड़कों के सापेक्ष लड़कियों की संख्या 689 रह गई है।
विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि बेटों की यह चाहत खत्म न हुई तो एक दिन गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। बावजूद इसके निगम में जन्म पंजीकरण पर गौर करें तो महानगर में बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले घट रही है।