सरहौल बॉर्डर स्थित टोल प्लाजा को हटाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। टोल के हटने का सबसे अधिक फायदा गुड़गांव और दिल्ली के नौकरीपेशा लोगों के साथ उद्योग जगत और कॉरपोरेट घरानों को होगा।
उद्यमी और कॉरपोरेट जगत लंबे समय से इसे हटाने की मांग कर रहे थे। इस बीच टोल हटाओ संघर्ष समिति ने टोल हटाने की प्रक्रिया को आम लोगों के संघर्ष की जीत बताया है।
बताया जा रहा है कि 13 जनवरी को दर्शन सिंह कंपनी (डीएससी) और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईडीएफसी) के बीच टोल के मालिकाना हक को लेकर करार हो गया।
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डीएससी ने 1600 करोड़ रुपये के लोन के बदले आईडीएफसी को टोल का मालिकाना हक देने का करार कर लिया है। मालिकाना हक मिलने के बाद कंपनी ने सरहौल टोल को हटाने की तैयारी कर ली है।
अगले पखवाड़े तक इसमें कोई बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इस बीच कंपनी ने यहां से टोल हटाकर खेड़कीदौला टोल पर ही वसूली करने का फैसला किया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों के बीच समझौते के बाद टोल के जल्दी हटने के असार बन गए हैं।
अब नहीं बिगड़ेगा कंपनियों का काम
गुड़गांव और मानेसर आईएमटी की करीब साढ़े तीन हजार छोटी-बड़ी इकाइयों में दिल्ली से आने वालों की संख्या खासी है।
टोल पर जाम के कारण ये लोग कभी भी समय नहीं पहुंच पाए। ट्रांसपोर्टर हुकम सिंह भारद्वाज कहते हैं कि वह कई कंपनियों को ट्रांसपोर्ट की सेवा प्रदान करते हैं। टोल के कारण आए दिन कंपनियों की शिकायत मिल रही है।
दूसरी ओर, ड्राइवर भी रात को देर तक टोल के जाम से परेशान थे। महीने में कई ड्राइवर काम छोड़कर चले जाते थे।