दिल्ली वाले ऐशो-आराम से हाथ खींच रहे हैं। महंगाई के दौर में घर-कार का सपना पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो शराब पीने के पैसे में भी कटौती कर रहे हैं। इससे दिल्ली सरकार के खजाने की सेहत खराब हो रही है।
जहां 21 फीसदी राजस्व वृद्धि का लक्ष्य सरकार ने रखा है वहां 31 अगस्त तक सरकार के खजाने में वृद्धि महज साढ़े सात फीसदी हुई है। वो तो विलासिता, सट्टेबाजी और मनोरंजन के शौक है दिल्ली वालों को जिसमें सरकार को लक्ष्य से ज्यादा राजस्व मिल रहा है।
सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार और उपराज्यपाल के साथ दिल्ली की चुनी गई सरकार की लड़ाई के बीच राजस्व वसूली में विभाग तेजी से पिछड़ रहे हैं। अगस्त, 2016 तक सरकारी खजाने को 12375 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है जो पिछले साल के मुकाबजे महज साढ़े सात फीसदी अधिक है। सरकार ने लक्ष्य 21 फीसदी वृद्धि का रखा था।
सूत्रों के अनुसार खजाने को सबसे बड़ा नुकसान प्रॉपर्टी बाजार में गिरावट से सामने आया है। सरकार ने स्टॉम्प ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन से 4000 करोड़ कर का लक्ष्य रखा था लेकिन 1435 करोड़ रुपये ही जुटा पाए हैं जो पिछले साल से 0.10 फीसदी कम है जबकि पिछले साल अगस्त तक वृद्धि दर 11 फीसदी थी।
मनोरंजन, सट्टेबाजी और होटल जाने के शौक कायम
दिल्ली
सूत्र बताते हैं कि शराब पीने वाले आबकारी कर से हर साल लक्ष्य से अधिक कर देते थे। सरकार ने पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी अधिक कर राजस्व के साथ 5200 करोड़ रुपये का लक्ष्य आबकारी से रखा था लेकिन सिर्फ 2 फीसदी वृद्धि हुई। पिछले साल इसमें 26 फीसदी वृद्धि हुई थी।
दिल्ली सरकार के खर्च पूरे करने में सबसे बड़ी भागीदारी निभाने वाले वैट विभाग से 24,500 करोड़ रुपये कर वसूली का लक्ष्य था जिसमें शुरुआत पांच महीने में सिर्फ 8345 करोड़ रुपये आए हैं जो पिछले साल से महज 9 फीसदी अधिक हैं जबकि लक्ष्य सरकार ने 21 फीसदी वृद्धि का रखा है।
मनोरंजन, सट्टेबाजी और होटल जाने के शौक कायम
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 में 875 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य विलासिता, सट्टेबाजी और मनोरंजन से रखा था जो पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी अधिक था। जबकि अभी तक 52 फीसदी अधिक वसूली हो चुकी है। इसमें बड़ी भागीदारी विलासिता कर की है जिसमें स्पा, जिम, बैंकट हॉल, होटल शामिल हैं।
योजनामद खर्च में 21 फीसदी खर्च से है थोड़ी राहत
सूत्र बताते हैं कि थोड़ी राहत इस बात से जरूर है कि योजनामत में खर्च पिछडने और खजाने में पिछले साल के पैसे बचे होने के कारण अभी 3900 करोड़ रुपये बचे हुए हैं।
सरकार चालू वित्त वर्ष के पांच महीने में सिर्फ 21 फीसदी(4278 करोड़) योजनामद का पैसा खर्च कर पाई है। हालांकि 26 हजार करोड़ की गैर योजनामद राशि में 37 फीसदी पैसा सरकार खर्च कर चुकी है।