मंगल सुधारने के चक्कर में बंदरों को खाना खिलाना आपके लिए अमंगलकारी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग व प्रशासन ने आवासीय क्षेत्रों में बंदरों को भोजन-फल खिलाने पर रोक लगा दी है।
इसके तहत बंदरों को खाने का सामान देना अपराध घोषित किया गया है। इनको खाना देने पर वन विभाग, प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकाय के अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं।
आरोपी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। जल्द ही बंदरों को खाना देने की सूचना देने के लिए टोलफ्री नंबर नंबर जारी किया जाएगा। सौ नंबर पर भी शिकायत करने की अनुमति मिल जाएगी।
शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में इस आदेश को सख्ती से लागू करने की योजना है। इसके बाद सभी शहरों में योजना लागू होगी। आवासीय क्षेत्रों मे खाना मिलने से बंदर शहरों-कस्बों में आ गए।
बंदरों की बढ़ती संख्या के चलते इन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिलता है। ऐसे में ये हमलावर हो रहे हैं। बंदरों के कारण एनसीआर में हर महीने औसतन 60 व्यक्ति घायल होते हैं।
हर साल करीब 20 लोगों की जान बंदरों के हमले और रैबीज के कारण जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में फॉरेस्ट अफसरों से बंदरों की समस्या पर सुझाव मांगे थे।
इसके बाद करीब पांच साल पहले आवासीय क्षेत्रों में बंदरों को खाने का सामान देने पर रोक लगा दी गई थी। इस आदेश को लागू किया है।